Monday, June 21, 2021
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    ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग (Prince Philip: Duke of Edinburgh)

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    Duke of Edinburgh
    Prince Philip died at 99-Duke of Edinburgh

    1.  प्रिंस फिलिफ कौन थे?
    वे ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति थे। उनका 9 अप्रैल, 2021 को विंडसर कैसेल में निधन हो गया। वे कोरोना से संक्रमित थे। उनका संक्रमण और हृदय संबंधी रोग का इलाज चल रहा था। वे 99 वर्ष के थे। उन्हें ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग भी कहा जाता था। उनका और महारानी एलिजाबेथ का लगभग 73 वर्ष का साथ रहा। वे किसी ब्रिटिश शासक के काल के सर्वाधिक समय तक पटराजा रहे थे। वे ब्रिटिश परिवार के सबसे वृद्ध पुरूष सदस्य भी थे।

    जीवन परिचय
    >  उनका जन्म ग्रीस के कोर्फू आइलैंड में 10 जून, 1921 को हुआ था। वे ग्रीस व डेनिश राजपरिवार के सदस्य थे। वे अपने गृह देश से परिवार सहित निर्वासित हो गए थे।
    >  ग्रीस छोड़ने के बाद वे फ्रांस, जर्मनी व ब्रिटेन आए।
    >  उन्होंने ब्रिटेन में शिक्षा पाने के बाद लंबे समय तक ब्रिटिश शाही नौसेना में सेवाएँ दी।
    >  उनकी शादी महारानी एलिजाबेथ से 1947 में हुई थी। इसके पाँच वर्ष बाद 1952 में एलिजाबेथ महारानी बनी थी।
    >  उनकी पत्नी ने उन्हें सन् 1957 में ब्रिटिश का राजकुमार बना दिया। उन्होंने महारानी को 60 वर्ष तक उनके दायित्व के निर्वहन में मदद की।उनके आठ पोते और पाँच पड़पोते हैं।
    >  वे प्रिंस चार्ल्स के पिता और प्रिंस हैरी व प्रिंस विलियम के दादा थे। वे अपना अधिकतर समय नॉरफ्लोक स्थित महारानी के सैंडीघम स्टेट में ही बिताते थे।
    >  वे 2017 में अपनो सार्वजनिक कर्तव्यों से सेवानिवृत्त हो गए थे।
    >  उन्होंने ब्रिटेन की राजशाही को आधुनिक रूप देने में अहम भूमिका निभाई थी।

    प्रिंस फिलिफ : एक दृष्टि में —
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    (i) पूरा नाम — फिलिफ माउंटबेटन
    (ii) जन्म की तिथि एवं स्थान — 10 जून 1921, मॉन रेपोस, कोर्फू द्वीप, यूनानी साम्राज्य
    (iii) घराना —ग्लुक्सबर्ग राजघराना (1947 तक) तथा (माउंटबेटन 1947 से)
    (iv) मृत्यु की तिथि एवं स्थान — 9 अप्रैल, 2021, विंडसर कैसल, विंडसर, यूनाइटेड किंगडम
    (v) पत्नी — एलिजाबेथ द्वितीय (विवाह — 20 नवंबर, 1947)
    (vi) संतान — चार्ल्स, वेल्स के राजकुमार (पुत्र) , ऐनी, प्रिंसेस रॉयल (पुत्री), राजकुमार ऐंड्रयु, यार्क के ड्यूक (पुत्र), राजकुमार एडवर्ड , वेसेल्स केअल (पुत्र)
    (vii) बहन — प्रिंसेस सेसिली ऑफ ग्रीस एण्ड डेनमार्क
    (viii) माता-पिता — प्रिंसेस ऐलिस ऑफ वैटेन- बर्ग, प्रिंस एंड्रयू ऑफ ग्रीस एण्ड डेनमार्क
    (ix) पदवी और अलंकार — हिजरोयल हाइनेस और एडिनबर्ग के ड्यूक
    (x) सेवा के वर्ष — 1939-1959 (सक्रिय सेवा)

    नागरिकता संशोधन अधिनियम Citizenship Amendment Act (CAA)

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    CAA
    Citizenship Amendment Act (CAA)

    वर्तमान में 5 राज्यों (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पांडिचेरी और असम) में चल रहे चुनावों के भाषणों, रैलियों आदि में CAA, NRC आदि नागरिकता से संबंधित शब्दों का काफी प्रयोग किया जा रहा है। इन शब्दों का प्रयोग क्यों किया जा रहा है? वास्तव में ये शब्द नागरिकता संशोधन कानून से संबंधित हैं। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है। यद्यपि केंद्र सरकार इस पर कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं हैं। लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही नागरिकता संशोधन विधेयक ने कानून का रूप ले लिया है।

    1.  नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 क्या है?
    वास्तव में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 एक ऐसा बिल है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आने वाले 6 समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी) के अवैध शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने की बात करता है।
    इसके अतिरिक्त यह भारत के विदेशी नागरिक (Overseas Citizen of India—OCl) कार्ड धारकों के पंजीकरण और उनके अधिकारों को नियंत्रित करता है। OCI भारत यात्रा के लिए पंजीकरण प्रणाली को बहुउद्देशीय, आजीवन वीजा जैसे कुछ लाभ प्रदान करता है।

    2.  नागरिकता कौन प्रदान करता है?
    भारतीय संविधान के अनुसार, नागरिकता एक संघीय विषय है। राज्य सरकारों को इस संबंध में कार्य करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। नागरिकता के संबंध में नियम बनाने और उन्हें संचालित करने का अधिकार केवल केन्द्रीय संसद को ही प्राप्त है।

    3.  नागरिकता को प्रमाणित कैसे किया जा सकता है?
    इसे निम्नलिखित रूप में प्रमाणित किया जा सकता है —
    (i)जमीन के दस्तावेज, जैसे —बैनामा, भूमि के मालिकाना हक का दस्तावेज।
    (ii) राज्य के बाहर से जारी किया गया स्थायी निवास प्रमाणपत्र।
    (iii) भारत सरकार की ओर से जारी पासपोर्ट।
    (iv) किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी लाइसेंस /प्रमाणपत्र।

    4.  नागरिकता कानून क्या है?
    31 दिसम्बर, 2014 या उससे पहले भारत आने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धर्मों के अल्पसंख्यकों को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा। नागरिकता अधिनियम, 1955 अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से प्रतिबंधित करता है।

    5.  संविधान में अब तक कितनी बार संशोधन हो चुका है?
    26 नवम्बर, 1949 को भारत का संविधान पारित हुआ तथा यह 26 जनवरी, 1950 को औपचारिक रूप से लागू किया गया था।अब तक 126 संविधान संशोधन विधेयक संसद में लाए गए हैं जिनमें से 104 संविधान संशोधन विधेयक पारित हो चुके हैं।

    6.  भारत का नागरिक कौन है?
    अनुच्छेद 5 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भारत में जन्म लेता है और उसके माता-पिता दोनों या दोनों में से कोई एक भारत में पैदा हुआ हो तो वह भारत का नागरिक होगा। भारत का संविधान लागू होने के पाँच वर्ष से पहले से भारत में रह रहा प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक होगा।

    7.  भारतीय नागरिकता किस प्रकार प्राप्त की जा सकती है?
    भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार भारतीय नागरिकता निम्न 5 प्रकार से प्राप्त की जा सकती है —
    (i) जन्म से (By Birth)
    (ii) वंश परम्परा द्वारा
    (iii) पंजीकरण द्वारा
    (iv) देशीकरण द्वारा
    (v) भूमि के अर्जन द्वारा

    8.  NRC (National Register of Citizens) के लिए क्या-क्या प्रमाण पत्र चाहिए?
    इसके लिए मांगे गए आवश्यक दस्तावेज हैं —
    (i) 1951 का NRC
    (ii) 24 मार्च, 1971 तक का मतदाता सूची में नाम
    (iii) जमीन का मालिकाना हक या किरायेदार होने का रिकॉर्ड
    (iv) नागरिकता प्रमाण पत्र
    (v) स्थायी निवासी प्रमाण पत्र
    (vi) शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र
    (vii) किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी लाइसेंस /सर्टिफिकेट

    9.  NRC लागू करने का उद्देश्य क्या है?
    इसे लागू करने का मुख्य उद्देश्य यही है कि अवैध नागरिकों की पहचान करके या तो उन्हें वापस भेजा जाए या फिर जिन्हें संभव हो, उन्हें भारत की नागरिकता देकर वैध बनाया जाए।

    10.  NRC की आवश्यकता क्यों पड़ी?
    इसकी आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि 1971 के दौरान बांग्लादेश से बहुत सारे लोग भारतीय सीमा में घुस गए थे। ये लोग अधिकतर असम और प० बंगाल में घुसे थे। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि जो घुसपैठिए हैं, उनकी पहचान करके उन्हें बाहर निकाला जाए।

    11.  इस नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर क्या चिंताएँ व्यक्त की जा रही है?
    आलोचकों के अनुसार,
    *  यह 1985 के असम समझौते का उल्लंघन करता है जिसके अनुसार 25 मार्च, 1971 के बाद बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को धर्म की परवाह किए बिना देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।
    *  इससे NRC का प्रभाव खत्म हो जाएगा।
    *  यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है (जो नागरिक और विदेशी दोनों को समानता और अधिकार की गारंटी देता है।) क्योंकि धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत संविधान की प्रस्तावना में निहित है।
    *  भारत में कई अन्य शरणार्थी हैं जिनमें श्रीलंका, तमिल और म्यांमार से आए हिंदू रोहिंग्या शामिल हैं लेकिन उन्हें अधिनियम के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है।

    12.  यह कानून कहाँ लागू नहीं होगा?
    यह कानून संविधान की छठी अनुसूची में शामिल राज्य व आदिवासी क्षेत्रों में लागू नहीं होगा—
    *  असम : कारबी आंगलोंग जिला, बोडोलैंड, नार्थ चाधर हिल्स जिला।
    *  मेघालय : खासी हिल्स, जयंतियां हिल्स और गारो हिल्स जिले। मेघालय में सिर्फ शिलांग को छोड़कर शेष क्षेत्रों में कानून लागू नहीं होगा।
    *  त्रिपुरा के आदिवासी जिले।
    *  मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड।
    *  ये प्रावधान बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के अंतर्गत अधिसूचित ‘इनर लाइन’ क्षेत्रों पर भी लागू नहीं होंगे।

    गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम Unlawful Activities Prevention Act (UAPA)

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    UAPA
    Unlawful Activities Prevention Act (UAPA)

    UAPA Act एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। हाल ही में किसान आंदोलन के अंतर्गत 26 जनवरी, 2021 को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा और सेलेब्रिटी ट्वीट विवाद के बाद इस कानून के अंतर्गत गिरफ्तारियां की गई हैं। जिन्हें लेकर देश में उबाल है।

    1.  गैर कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA ACT) क्या है?
    इस कानून का मुख्य काम आंतकी गतिविधियों को रोकना है। इस कानून के अंतर्गत पुलिस ऐसे आतंकियों, अपराधियों या अन्य लोगों को चिह्नित करती है, जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं, इसके लिए लोगों को तैयार करते हैं या फिर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को काफी शक्तियां प्राप्त होती है। एन आई ए महानिदेशक किसी मामले की जांच के समय संबंधित व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की-जब्ती भी करवा सकते हैं।

    2.  यह कानून कब आया तथा इसका संशोधन कब हुआ?
    यह कानून 1967 में लाया गया था। इस कानून को संविधान के अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत दी गई मूल स्वतंत्रता पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के लिए लाया गया था। यद्यपि 2004,2008, 2012 और 2019 में इस कानून में परिवर्तन किए गए। अगस्त 2019 में ही इसका संशोधन बिल संसद से पास हुआ था। इसके बाद इस कानून को शक्ति मिल गई है कि किसी भी व्यक्ति को जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इस कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति पर शक होने मात्र से ही उसे आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इसके लिए उस व्यक्ति का किसी आतंकी संगठन से संबंध दिखाना भी आवश्यक नहीं होगा।

    3.  इस कानून के प्रावधानों का दायरा क्या है?
    इस कानून के प्रावधानों का दायरा बहुत बड़ा है। इसलिए इसका प्रयोग अपराधियों
    के अलावा एक्टिविस्ट्स और आंदोलनकारियों पर भी हो सकता है।
    UAPA के सेक्शन 2(0) के अंतर्गत भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल करने को भी गैर कानूनी गतिविधियों में  शामिल किया गया है। इस कानून के अंतर्गत ‘भारत के खिलाफ असंतोष’ फैलाना भी कानूनन अपराध है।
    *  UAPA में धारा 18,19,20,38 और 39 के अंतर्गत केस दर्ज होता है।
    *  धारा 38 तब लगती है जब आरोपी के आतंकी संगठन से जुड़े होने की बात पता चलती है। धारा 39 आतंकी संगठनों को मदद पहुँचाने पर लगाई जाती है।
    *  धारा 43D (2) में किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत की अवधि दुगुना करने का प्रावधान है। इसमें पुलिस को 30 दिन की कस्टडी मिल सकती है।वहीं न्यायिक हिरासत 90 दिन की भी हो सकती है।
    *  धारा 43D (5) के अनुसार, कोर्ट व्यक्ति को जमानत नहीं दे सकता, अगर उनके विरुद्ध प्रथम दृष्टया केस बनता है।
    *  गैर कानूनी संगठनों, आतंकवादी गैंग और संगठनों की सदस्यता को लेकर इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
    *  सरकार द्वारा घोषित आतंकी संगठन का सदस्य पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।

    4.  इस कानून में संशोधन की आवश्यकता क्यों थी?
    मूल रूप से देश में अघोषित रूप में फैले हुए कई आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए यह प्रावधान संशोधित किए गए थे। पूर्व के कानून के अनुसार आतंकी संगठनों से संबंध रखने वाली संस्थाओं पर तो प्रतिबंध लगाए जा सकते थे लेकिन उनके संचालक या सदस्य बच जाते थे। कुछ समय बाद वे संचालक या सदस्य पुनः नए नाम से नया संगठन या नई संस्था बना लेते थे। इस संकट को भांपते हुए 2019 में केंद्र सरकार ने 1967 के बने हुए गैर – कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम में कठोर संशोधन किए। जिसके बाद से आतंकी संगठनों से किसी भी तरह का संबंध रखने वाली संस्थाओं के साथ ही उनके संचालक और सदस्य भी प्रतिबंध के दायरे में आ गए। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियां शक होने की स्थिति में उन्हें आतंकी भी घोषित कर सकती हैं ।

    5.  इस कानून (UAPA) पर विवाद का मुख्य कारण क्या है?
    इस कानून( U A P A) को लेकर विपक्षी दल और एक्टीविस्ट हमेशा से इसके विरोध में रहे हैं। उनका डर है कि सरकार इस कानून का प्रयोग उन्हें चुप कराने के लिए कर सकती है। एक्टीविस्ट समूहों के लोगों का कहना है कि सरकार इस कानून का अनाधिकृत और मनमाना प्रयोग करते हुए संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के अंतर्गत मिले अधिकारों का हनन कर सकती है। उन्हें शक है कि असली आतंकियों के साथ-साथ सरकार की नीतियों के विरोधी लेखकों, अभियुक्तों के वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर भी इसका प्रयोग हो सकता है।

    रजनीकांत :51 वां दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता

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    Rajnikant
    Dada Saheb Falke Award

    सिनेमा जगत के ‘थलाइवा’ (भगवान) अभिनेता और दक्षिण फिल्मों के सुपर स्टार रजनीकांत को 51वें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (वर्ष 2019)  से सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 1 अप्रैल 2021 को इस बात की जानकारी दी।

    1.  भारतीय सिनेमा में रजनीकांत का योगदान क्या है ?
    रजनीकांत भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं। भारतीय सिनेमा में अभिनेता, निर्माता और स्क्रीन राइटर के रूप में उनका योग आइकॉनिक है। इन्होंने ने न सिर्फ साउथ फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी है बल्कि कई बॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आए हैं जिसमें चालबाज, अंधा कानून, कबाली, 2.0, द रोबोट, त्यागी, खून का कर्ज, दोस्ती दुश्मनी, इंसाफ कौन करेगा आदि प्रमुख हैं।

    2.  इस अवार्ड के चयनकर्ता (ज्यूरी) कौन थे?
    इस पुरस्कार के विजेता का चयन भारतीय फिल्म प्रयोग की बड़ी हस्तियों की कमिटी द्वारा किया जाता है। यह पुरस्कार किसी अभिनेता /अभिनेत्री को भारतीय सिनेमा के विकास में उनके अहम योगदानों के लिए दिया जाता है।
    विजेता को एक स्वर्ण कमल (Golden lotus) मेडल, शॉल और 10 लाख रूपये नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। रजनीकांत के नाम के चयन में पाँचों ज्यूरी के सदस्यों का एक मत ही फैसला था। ये पाँचों ज्यूरी  सदस्य थे —आशा भोंसले, मोहनलाल, विश्व जीत चटर्जी , शंकर महादेवन और सुभाष घई।

    3.  यह पुरस्कार कौन देता है तथा विजेता का चयन किस प्रकार होता है?
    दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सिनेमा के क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार है। प्रतिवर्ष किसी एक अभिनेता या अभिनेत्री को इस पुरस्कार के लिए चयनित किया जाता है।डायरेक्टर ऑफ फिल्म फेस्टिवल्स द्वारा नेशनल अवार्ड्स समारोह (National Film Awards) में विजेता को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB – Ministry of Information and Broadcasting) के अधीन आती है।

    भारत सरकार ने आज से लगभग 50 वर्ष पूर्व 1969 में पहली बार दादा साहेब फाल्के अवार्ड की शुरूआत की थी। सबसे पहला दादा साहेब फाल्के अवार्ड अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था। उन्हें 17 वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। देविका रानी को भारतीय सिनेमा की फर्स्ट लेडी भी कहा जाता है। अमिताभ बच्चन को मिलाकर अब तक कुल 50 लोगों को यह सम्मान दिया जा चुका है।

    4.  दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के विजेता कौन – कौन हैं?
    दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के विजेता निम्नलिखित हैं —
    (i) देविका रानी (1969)
    (ii) बिरेन्द्र नाथ सरकार (1970)
    (iii) पृथ्वीराज कपूर (1971)
    (iv) पंकज मल्लिक (1972)
    (v) रुपी मियर्स (सुलोचना) (1973)
    (vi) बी एन रेड्डी (1974)
    (vii) धीरेंद्र नाथ गांगुली (1975)
    (viii) कानन देवी (1976)
    (ix) नितिन बोस (1977)
    (x)रामचंद बोरल (1978)
    (xi) सोहराब मोदी (1979)
    (xii) पैदी जयराज (1980)
    (xiii) नौशाद (1981)
    (xiv) एल वी प्रसाद (1982)
    (xv) दुर्गा खोटे (1983)
    (xvi) सत्यजीत रे (1984)
    (xvii) वी. शांताराम (1985)
    (xviii) वी नागी रेड्डी (1986)
    (xix) राज कपूर (1987)
    (xx) अशोक कुमार (1988)
    (xxi) लत्ता मंगेशकर (1989)
    (xxii) अक्कीनेनी नागेश्वर राव (1990)
    (xxiii) भालजी पेंधरकर (1991) 
    (xxiv) भूपेन हजारिका (1992)
    (xxv) मजरूह सुल्तानपुरी (1993)
    (xxvi) दिलीप कुमार (1994)
    (xxvii) राज कुमार (1995)
    (xxviii) शिवाजी गणेशन (1996)
    (xxix) कवि प्रदीप (1997)
    (xxx) वी आर चोपड़ा (1998)
    (xxxi) ऋषिकेश मुखर्जी (1999)
    (xxxii) आशा भोंसले (2000)
    (xxxiii) यश चोपड़ा (2001)
    (xxxiv) देवानंद (2002)
    (xxxv) मृणाल सेन (2003)
    (xxxvi) अदूर गोपालकृष्णन (2004)
    (xxxvii) श्याम बेनेगल (2005)
    (xxxviii) तपन सिंह (2006)
    (xxxix) मन्ना डे (2007)
    (XL) वी के मूर्ति (2008)
    (XLi) डी रामनायडु (2009)
    (XLii) के . बालचंद (2010)
    (XLiii) सॉमित्र चटर्जी (2011)
    (XLiv) प्राण (2012)
    (XLv) गुलजार (2013)
    (XLvi) शशि कपूर (2014)
    (XLvii) मनोज कुमार (2015)
    (XLviii) कासी नाथुनी विश्वनाथ (2016)
    (XLix) विनोद खन्ना (2017)
    (L) अमिताभ बच्चन (2018)

    *  रजनीकांत कांत : एक परिचय –
    (i)वास्तविक नाम – शिवाजी गायकवाड़
    (ii) जन्म -12 दिसंबर, 1950
    (iii) जन्म स्थान – बैंगलोर, मैसूर राज्य, भारत
    (iv) आवास – चेन्नई, तमिलनाडु, भारत
    (v) व्यवसाय – अभिनेता, निर्माता, पटकथा लेखक
    (vi) भाषाई फिल्में – तमिल एवं हिन्दी
    (vii) सक्रिय वर्ष – 1975
    (viii) पत्नी – लता रजनीकांत
    (ix) बच्चे – ° ऐश्वर्या आर धनुष
                    ° सौंदर्या
    (x) संबंधी – धनुष (जामाता)
    (xi) पुरस्कार – पद्म विभूषण (2015) ;पद्म भूषण (2000) ;फिल्म फेयर अवार्ड (1984)
    (xii) प्रथम फिल्म – अपूर्व रांगगल (1975)

    विमुद्रीकरण (Demonetization) और देश की आर्थिक व्यवस्था

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    Indian Demonetization History
    Indian Demonetization History in details

    1.  नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization) क्या है?
    विमुद्रीकरण (Demonetization) एक आर्थिक गतिविधि है जिसके अंतर्गत सरकार पुरानी मुद्रा को समाप्त कर देती है और नई मुद्रा को चालू करती है। जब काला धन बढ़ जाता है और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन जाता है तो इसे दूर करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है। जिनके पास काला धन होता है, वे उसके बदले में नई मुद्रा लेने का साहस नहीं जुटा पाते हैं और काला धन स्वयं ही नष्ट हो जाता है। विमुद्रीकरण के बाद पुरानी मुद्रा अथवा नोटों की कोई कीमत नहीं रह जाती। हालांकि सरकार द्वारा पुरानी नोटों को बैंकों से बदलने के लिए लोगों को समय दिया जाता है, ताकि वे अमान्य हो चुके अपने पुराने नोटों को बदल सकें।

    2.  वर्ष 2016 में कौन-कौन नोट रद्द कर दिए गए थे?
    8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में 1000 और 500 रूपए के नोट बंद करने की घोषणा की अर्थात् विमुद्रीकरण (Demonetization) की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने भी सरकार की इस घोषणा का समर्थन किया। इसके बाद सरकार 500 और 2000 रूपए के नए नोट भी बाजार में लेकर आई। आरबीआई के अनुसार 31 मार्च, 2016 तक भारत में 16. 42 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बाजार में थे, जिसमें से लगभग 14.18 लाख रुपए 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। 1938 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक 10 हजार रुपए से अधिक का नोट जारी नहीं किया।

    3.  भारत में नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization)कब-कब और कितनी बार हुआ है?
    (i)  विमुद्रीकरण (Demonetization) हमारे देश के लिए कोई नई बात नहीं थी। हमारे भारत में पहली बार वर्ष 1946 में 500, 1000 और 10 हजार के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया था।
    1970 के दशक में भी प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वांचू कमेटी ने विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था, लेकिन सुझाव सार्वजनिक हो गया, जिसके चलते नोटबंदी नहीं हो पाई।
    (ii) जनवरी 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने एक कानून बनाकर 1000,5000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए। हालांकि तत्कालीन आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल ने इस नोटबंदी का विरोध किया था।
    (iii) वर्ष 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया था।
    (iv) 2016 में भी मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों की नोटबंदी या विमुद्रीकरण का फैसला किया। इन दो करेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के 86% भाग पर कब्जा किया था। यही नोट बाजार में सबसे अधिक प्रचलन में थे। इसी कारण से इसका इतना बड़ा बवाल और परिणाम हुआ

    4.  नोटबंदी के समय भारत की स्थिति कैसी हो गई थी?
    नोटबंदी के समय पूरा भारत ‘कैशलेस’ हो गया था। सारा लेन – देन ऑनलाइन हो गया था। इस समय लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विमुद्रीकरण ने लोगों को थोड़े दिन की परेशानी जरूर दी थी लेकिन इससे बहुत ही ज्यादा लाभ भी हुआ है। ऐसा भी कहा जाता है कि विमुद्रीकरण की योजना उतनी सफल नहीं रही जितनी होनी चाहिए थी।

    5.  नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization) के लाभ क्या है?
    नोटबंदी के समय लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बहुत से लाभ भी हुए हैं –
    (i) जब लोग बैंकों में पैसा बदलवाने गए तब उनके हर एक पैसे की जानकारी सरकार के पास चली गई। जिनके पास आय से ज्यादा पैसा मिला उनसे आयकर विभाग वालों ने जाँच पड़ताल की और बहुत से लोगों के पास मौजूद काला धन पकड़ा गया।
    (ii) काला धन ही है जो आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देता है। काला धन कम होने की वजह से आतंकवाद में भी कमी हुई है। क्योंकि वे जिस काले धन को दहशत फैलाने के लिए उपयोग कर रहे थे, नोटबंदी या विमुद्रीकरण के कारण वह केवल कागज रह गया था।
    (iii) नोटबंदी या विमुद्रीकरण की वजह से बहुत सा काला धन खत्म हुआ है और वह धन सरकार के कोष में जमा हो गया । जिसके कारण सरकार के पास धन बढ़ा है और सरकार ने उन पैसों को देश के विकास में प्रयोग किया है।
    (iv) बैकों में नकद होने के कारण ब्याज दरों में भी गिरावट हुई है।
    (v) बैंकों में पैसे होने के कारण लोगों को बड़े पैमाने पर उधार भी दिया जाता है जिससे वे उद्योग लगा सकें। इस तरह से रोजगार में भी वृद्धि हुई है।
    (vi) नोटबंदी या विमुद्रीकरण के कारण आम लोगों को आर्थिक कर और उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास हुआ है। यह बहुत बड़ी बात है।
    (vii) नोटबंदी या विमुद्रीकरण के होने से सभी ऑनलाइन , डिजिटल पेमेंट करने लगे हैं। यहाँ तक की चाय वाला, किराने वाला, जेरॉक्स, प्रिंटिंग वाला भी अब ऑनलाइन भुगतान करवाता है। यह नोटबंदी से प्राप्त हुई एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
    (viii) नोटबंदी या विमुद्रीकरण के कारण नकली नोट छापने का काम भी बंद हो गया है जिसकी वजह से देश से नकली नोटों को बहुत बड़ी मात्रा में निकाल दिया गया है।

    6.  नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization) की हानियाँ क्या हैं ?
    हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। अगर नोटबंदी के लाभ नजर आते हैं तो उसकी कुछ हानियाँ भी उसके साथ-साथ चलती आई हैं। लेकिन हानियाँ कुछ दिनों की थी और लाभ लंबे समय तक चलने वाले हैं। नोटबंदी से निम्नलिखित हानियाँ हुईं –
    (i) स्थानीय पैसा न होने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान पर्यटन स्थलों को हुआ। बहुत से लोगों ने अपने भारत दौरे को भी रद्द किया। काम में बहुत मंदी आई।
    (ii) आम लोगों के दैनिक जीवन में तकलीफ हुई हैं।उन्हें बैंकों और एटीएम के सामने घंटों लाइनों में खड़े रहना, अस्पताल का बिल, बिजली का बिल, किराये की समस्या और बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
    (iii) लोग शादियाँ भी उतनी धूमधाम से नहीं कर पाए जितना उन्होंने सोचा था।
    (iv) वर्तमान में नोटबंदी पर बहुत सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि नोटबंदी असफल हुई है। यह एक योजना है जिसमें काले धन को सफेद किया जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि नोटबंदी से कोई लाभ नहीं हुआ है सिर्फ हानि हुई है। भारत की आर्थिक प्रगति दर 7.5 से कम होकर 6.3 हो गई है।
    (v) नए नोटों को छापने में बहुत पैसा खर्च हुआ। शायद नोटबंदी से जिस स्तर की अपेक्षाएँ की गई थी वे हासिल नहीं हुईं।

    N.C.T Bill 2021

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    NCT Bill 2021
    NCT Bill 2021 in details

    1.  एन सी टी बिल 2021 क्या है?
    दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की चुनी हुई सरकार को विधायिका और प्रशासन से जुड़े प्रस्तावों को उपराज्यपाल के पास भेजने की एक टाइम लाइन (time line) है।
    केंद्र सरकार ने 22 मार्च, 2021 को संसद में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (N.C.T) शासन संशोधन विधेयक 2021 पारित कराया था। जिसमें उपराज्यपाल को और अधिकार देने की बात कही गई है। इस विधेयक को लेकर देश की राजधानी की राजनीति में टकराव देखने को मिला। दिल्ली सरकार और संसद में विपक्षी दलों ने इस विधेयक को काला कानून बताते हुए लोकतंत्र के विरूद्ध ठहराया था। जबकि केंद्र सरकार का तर्क था कि यह विधेयक कोई नया विधेयक नहीं है, इसे 1991 मेें ही लाया गया था। हम केवल इसमें आवश्यक संशोधन कर रहे हैं जिससे दिल्ली सरकार सुचारू रूप से चल सकेगी।

    2.  पुराना कानून क्या है?
    देश के आठ केन्द्र शासित प्रदेशों में से दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों में अनुच्छेद 239 लागू होता है। वर्ष 1991 में संविधान में 69वां संशोधन किया गया था। जिसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए अनुच्छेद 239AA और 239AB को लाया गया।

    3.  69 वां संविधान संशोधन (1991) क्या है?
    69वें संविधान संशोधन (1991) के अंतर्गत दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बनाया गया। दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के लिए 70 सदस्यीय विधान सभा और सात मंत्रिपरिषद् का प्रावधान किया गया था।

    4.  अनुच्छेद 239AA क्या है?
    इसके अंतर्गत दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT of Delhi) का दर्जा दिया गया है। इसके प्रशासक एल जी (LG) अर्थात् उपराज्यपाल हैं। संविधान के 239A अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति दिल्ली के लिए उपराज्यपाल की नियुक्ति करते हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल के पास अन्य राज्यपालों की तुलना में अधिक शक्तियां हैं। दिल्ली विधान सभा पुलिस, कानून व्यवस्था और भूमि संबंधी कानून नहीं बना सकती है क्योंकि ये तीनों अधिकार केंद्र सरकार और संसद के अधीन हैं। किसी मुद्दे पर यदि उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के फैसले में मतभेद है तो उपराज्यपाल मामला राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। इमर्जेंसी की स्थिति में उपराज्यपाल फैसले ले सकते हैं।

    5.  अनुच्छेद 239AB क्या है?
    इस अनुच्छेद (239AB) की शक्तियां इमर्जेंसी की स्थिति में लागू होती है। यदि उपराज्यपाल को लगता है कि मंत्रिमंडल, सरकार का संचालन करने में अक्षम है तो वह राष्ट्रपति को इमर्जेंसी लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं।

    6.  संशोधन विधेयक 2021 के प्रावधान क्या हैं ?
    इस नए विधेयक के अंतर्गत दिल्ली में ‘सरकार’शब्द का आशय ‘उपराज्यपाल’ होगा। इसमें उपराज्यपाल के विवेक के अधीन शक्तियों का विस्तार किया गया है। यह विधेयक सुनिश्चित करता है कि दिल्ली में दिल्ली मंत्रिमंडल द्वारा लिए जाने वाले किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले उपराज्यपाल से विचार – विमर्श करना आवश्यक है। विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि उक्त विधेयक विधानसभा और कार्यपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का विकास करेगा। इस संशोधन का उद्देश्य मूल विधेयक में जो अस्पष्टता है उसे दूर करना, जिससे इसे लेकर विभिन्न अदालतों में कानून को चुनौती नहीं दी जा सके।

    7.  विधेयक में संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
    विगत कुछ वर्षों में कई बार दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल की शक्तियों में टकराव के मामले सामने आए थे। 1991 के अधिनियम में प्रक्रिया और कार्य संचालन से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। यद्यपि इसमें कई शक्तियों की स्पष्ट रूप से व्याख्या नहीं की गई है तथा फैसलों के प्रभावी समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए कोई संरचनात्मक तंत्र स्थापित नहीं किया गया है। इस संशोधन विधेयक में दिल्ली के उपराज्यपाल की कुछ भूमिकाओं और उनके अधिकारों को परिभाषित किया गया है।

    जस्टिस एन वी रमना : एक परिचय

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    NV Ramana Images
    Justice NV Ramana

    भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एस ए बोबडे (Sharad Arvind Bobde) ने अपने उत्तराधिकारी और देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस एन वी रमना (NV Ramana) का नाम केंद्र को सुझाया है। CJI बोबडे 23 अप्रैल, 2021 को सेवा निवृत्ति होने वाले हैं। नियमों के अनुसार, वर्तमान मुख्य न्यायाधीश सेवा निवृत्ति से एक महीने पहले उत्तराधिकारी को लेकर सिफारिश भेजते हैं। अगर सरकार द्वारा सिफारिश को मंजूरी मिल जाती है, तो जस्टिस रमना 24 अप्रैल, 2021 को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

    > जन्म – जस्टिस नथालपति वेंकट रमना (Nathalapati Venkata Ramana) का जन्म 27 अगस्त, 1957 को आंध्र प्रदेश राज्य के कृष्णा जनपद के पोन्नवरम गाँव में एक कृषक परिवार में हुआ था। एन एस भुवन और एन वी तनुजा इनकी दो संतानें हैं।

    >  शिक्षा – इन्होंने साइंस और लॉ (BSc.,LLB) में स्नातक किया है। इन्होने आचार्य नागाजुंन विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट, केन्द्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट में कानून की प्रैक्टिस शुरू की। राज्य सरकारों की एजेंसियों के लिए वे पैनल काउंसिल के रूप में भी काम करते थे।
    >  कॅरियर – उन्हें 10 फरवरी, 1983 को बार में एक वकील के रूप में नामांकित किया गया था। उन्हें 27 जनवरी, 2000 को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्होंने 10 मार्च, 2013 से 20 मई, 2013 तक आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में काम किया। उन्होंने 2 सितम्बर, 2013 में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य भार संभाला।
    >  संप्रति – 17 फरवरी, 2014 से ये उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश हैं।
    >  चर्चित फैसले – विगत कुछ वर्षों से जस्टिस रमना का सबसे चर्चित फैसला जन्म जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की बहाली का रहा है। चीफ जस्टिस के कार्यालय को सूचना अधिकार कानून (RTI) के दायरे में लाने का फैसला देने वाली बेंच के भी जस्टिस रमना सदस्य रह चुके हैं।

    1.  मुख्य न्यायाधीश कौन बनते हैं?
    सबसे वरिष्ठ जज मुख्य न्यायाधीश बनते हैं। नियमों के अनुसार, सबसे वरिष्ठ जज को प्रधान न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया जाता है। कानून मंत्री सही समय पर वर्तमान CJI से उनके उत्तराधिकारी का नाम माँगते हैं। CJI से सिफारिशी चिट्ठी मिलने के बाद मंत्री इसे प्रधानमंत्री के सामने रखते हैं जो नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।

    2.  CJI के वेतन और भत्ते क्या होते हैं?
    न्यायाधीश के लिए वेतन भत्ते अधिनियम 1 जनवरी, 2009 के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को 2,80,000 रू० मासिक आय और न्यायाधीश को 2,50,000 रू० आय प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त इन्हें नि:शुल्क आवास, मनोरंजन स्टाफ, कार, यातायात भत्ता मिलता है। इनके लिए वेतन संसद तय करती है जो संचित निधि से पारित होती है। कार्यकाल के दौरान वेतन में कोई कटौती नहीं होती है। न्यायाधीश का कार्यकाल 65 वर्ष आयु तक होता है।

    3.  भारत की न्यायपालिका : एक दृष्टि में
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    भारतीय न्यायपालिका (Indian Judiciary) आम कानून (Common Law) पर आधारित प्रणाली है। यह प्रणाली अंग्रेजों ने ओपनिवेशिक शासन के समय बनाई गई थी। इस प्रणाली को आम कानून व्यवस्था के नाम से जाना जाता है। इसमें न्यायाधीश अपने फैसलों, आदेशों और निर्णयों से कानून का विकास करते हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति (15 अगस्त, 1947) के बाद 26 जनवरी, 1950 से भारतीय संविधान लागू हुआ। इस संविधान के माध्यम से ब्रिटिश न्यायिक समिति के स्थान पर नई न्यायिक संरचना का गठन हुआ था। इसके अनुसार भारत में कई स्तर के तथा विभिन्न प्रकार के न्यायालय हैं। भारत का शीर्ष न्यायालय नई दिल्ली स्थित सर्वोच्च न्यायालय है जिसके मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। इसके नीचे विभिन्न राज्यों में उच्च न्यायालय हैं। उच्च न्यायालय के नीचे जिला न्यायालय और उसके अधीनस्थ न्यायालय है जिन्हें निचली अदालत कहा जाता है।
    *  सर्वोच्च न्यायालय –
    भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का शीर्ष सर्वोच्च न्यायालय है जिसका प्रधान प्रधान न्यायाधीश होता है। सर्वोच्च न्यायालय करे अपने नए मामलों तथा उच्च न्यायालयों के विवादों, (दोनों) को देखने का अधिकार है। भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं, जिनके अधिकार और उत्तरदायित्व सर्वोच्च न्यायालय की अपेक्षा सीमित हैं। न्यायपालिका और व्यवस्थापिका के परस्पर मतभेद या विवाद का फैसला राष्ट्रपति करता है।

    *  न्यायाधीश की नियुक्ति –
    भारत के संविधान में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर नियम बनाए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायाधीश की सलाह से होती है। उनकी नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश और चार परिष्ठ जजाँ के समूह के अंतर्गत होती है। उसी प्रकार हाइकोर्ट के लिए राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश, उस राज्य के राज्यपाल और उस हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सलाह पर नियुक्ति करता है।

    *  न्यायाधीशों की पदच्युति –
    किसी जज को उसके पद से कदा चार के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश पर हटाया जा सकता है। सर्वोच्च तब ही हटाया जा सकता है जब नोटिस पर 50 राज्य सभा या 100 लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर हो।

    *  जज बनने की पात्रता –
    >  उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
    >  सुप्रीम कोर्ट का जज बनने हेतु उसका पाँच वर्ष अधिवक्ता के रूप में या किसी हाइकोर्ट के रूप में दस वर्ष कार्य किया होना आवश्यक है।
    >  हाईकोर्ट का जज बनने हेतु उसका किसी हाइकोर्ट में कम से कम दस वर्ष अधिवक्ता के रूप में कार्य किया होना आवश्यक है।

    टोक्यो ओलंपिक मशाल यात्रा 2021 (Olympic Torch Relay 2021)

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    Olympic Torch relay
    Olympic Torch Relay 2020

    कोविड-19 के कारण एक वर्ष की देरी से होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों की मशाल यात्रा का 25 मार्च, 2021 को आरंभ हो गया। यह खेल 24 जुलाई, 2020 से 9 अगस्त, 2020 के बीच टोक्यो, जापान में होना था। इन खेलों के आयोजन को लेकर सारे अटकलों और संशयों के बीच अंततः टोक्यो ओलंपिक की 121 दिवसीय मशाल यात्रा शुरू हुई। यह 23 जुलाई को टोक्यो में उद्घाटन समारोह के साथ समाप्त होगी। इस मशाल यात्रा में लगभग 10,000 धावकों के भाग लेने की आशा है। यह मशाल यात्रा जापान के 47 शहरों से होकर गुजरेगी।

    1.  टोक्यो ओलंपिक मशाल यात्रा की प्रमुख बातें क्या हैं?
    a) रिले की शुरुआत फुकुशिमा से हुई जो 2011 के भूकंप, सुनामी और परमाणु संयंत्रों से रिसाव की त्रासदी झेल चुका है। इस दर्दनाक त्रासदी में लगभग 18,000 लोग मारे गए थे।
    b) यह मशाल सबसे पहले अजुसा इवाशिमिझु ने थामी जो 2011 महिला विश्व कप फुटबॉल जीतने वाली जापान टीम की अहम सदस्या थी। इसके बाद अजुसा ने मशाल फुकुशिमा हाई स्कूल की छात्रा असातो ओवादा को थमाई।

    2.  ओलंपिक खेलों में मशाल क्यों जलाई जाती है?
    मशाल को प्राचीन और आधुनिक खेल के संगम से जोड़कर देखा जाता है।ग्रीस में प्राचीन ओलंपिक के पवित्र स्थान पर स्थित हेरा के मंदिर में मशाल जलाई जाती है। दर्पण की मदद से सूर्य की किरणों की तेज से प्रज्ज्वलित होने वाली यह मशाल ओलंपिक खेलों के शुभारंभ से महीनों पहले विश्वभर की अपनी यात्रा खत्म कर मेजबान देश में पहुँचती है।फिर मेजबान देश में मशाल रिले का आयोजन होता है। इसके बाद मेजबान देश का एक प्रसिद्ध एथलीट उद्घाटन समारोह के दिन इससे स्टेडियम में लगाए गए मशाल को प्रज्ज्वलित करता है। इसके साथ ही ओलंपिक खेलों की शुरुआत हो जाती है।
    मशाल जलाने की प्रथा 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक खेलों से पुनः आरंभ की गई थी। लेकिन ओलंपिक मशाल रिले की शुरुआत 1936 के बर्लिन गेम्स से हुई थी। इसके 24 वर्ष बाद 1960 में रोम ओलंपिक की मशाल यात्रा का पहली बार टी वी प्रसारण हुआ था।

    3.  कोविड-19 के कारण नियमों में क्या परिवर्तन किए गए हैं?
    a) टोक्यो ओलंपिक के खेल केवल स्थानीय लोगों के लिए ही खुले रहेंगे। लेकिन उन्हें भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
    b) प्रशंसकों को गाने एवं नाचकर जश्न मनाने पर पाबंदी रहेगी।
    c) अंतरराष्ट्रीय बोलंटियर भी नहीं आ सकेंगे।
    d) खिलाड़ियों को जापान पहुँचते ही 14 दिन कारंटीन नहीं होना पड़ेगा लेकिन उनके पास कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट होनी अनिवार्य है।
    e) खिलाड़ियों का हर चौथे दिन कोरोना टेस्ट होगा। रिपोर्ट पॉजिटिव होने पर उसे प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं लेने दिया जाएगा।
    f) खिलाड़ियों के लिए कोरोना वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं होगा।
    g) खिलाड़ियों का पर्यटक स्थलों, रेस्टोरेंटों, बारों में जाना वर्जित होगा।

    4.  टोक्यो 2020 ओलंपिक : एक दृष्टि में
    a) 32वें ओलंपिक संस्करण में 33 खेलों की 339 स्पर्धाएँ आयोजित होंगी।
    b) 11 हजार से अधिक एथलीटों के इस खेलों में भाग लेने की आशा है।
    c) ओलंपिक खेलों की संस्था अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने 7 सितम्बर, 2013 को व्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना में अपने 125 वें अधिवेशन में टोक्यो को मेजबान शहर घोषित किया था।
    d) टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में इस बार बेसबॉल, सॉफ्टबॉल, कराटे, स्केटबोर्ड और सर्फिंग को भी शामिल किया गया है।
    e) खेलों के इस महाकुंभ की शुरुआत 23 जुलाई, 2021 से होगी और यह 8 अगस्त, 2021 को खत्म हो जाएँगी।
    f) मूल रूप से सभी प्रतियोगिता स्थलों, ओलंपिक गांव, IBC और MPC के प्रयोग के लिए बनाई गई योजना का ही वर्ष 2021 में पालन किया जाएगा।
    g) जिन एथलीटों ने टोक्यो 2020 ओलंपिक को पहले ही क्वालिफाई कर लिया है, उनकी जगह सुरक्षित रहेगी।
    h) ‘मिराइतोवा’ और ‘सोमाइटी’ को ओलंपिक में शुभंकर चुना गया जो नीले-चेक की धारियों (Indigo blue), हिरण जैसी आँखों और नुकीले कान वाला सुपर हीरो है। यह जापान की सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ‘मिराइतोवा’ जापानी कहावत से प्रेरित है। जापानी शब्द ‘मिराइतोवा’ में ‘मिराइ’ का अर्थ ‘भविष्य’ और ‘तोवा’ का अर्थ ‘अनंतकाल ‘ होता है।
    i) टोक्यो 2020 ने आधिकारिक खेलों के आदर्श वाक्य — United by Emotion का खुलासा किया है। आदर्श वाक्य खेल की शक्ति को विविध पृष्ठभूमि को एक साथ लाने और उनके मतभेदों से परे पहुँचने के तरीके से मनाने के लिए एक साथ लाने पर जोर देता है।
    j) जापान के अलावा किसी दूसरे देश के दर्शक टोक्यो जाकर इस खेल को नहीं देख सकते हैं।
    k) जापान इससे पहले तीन बार – 1964,1972 और 1988 में ओलंपिक का आयोजन कर चुका है।
    l) जापान ने ओलंपिक के सभी पदक पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामानों और फोन से बनाए हैं। पदक के पीछे के हिस्से में टोक्यो ओलंपिक का लोगो लगा है, आगे स्टेडियम की तस्वीर के सामने विजय का प्रतीक माने जाने वाली ग्रीक देवी ‘नाइक’ को दर्शाया गया है।
    m) भारत के अब तक 77 से अधिक खिलाड़ियों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है।

    सी बी एस ई असेसमेंट फ्रेमवर्क योजना (CBSE Assessment Framework Project)

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    CBSE Assessment Framework
    CBSE Assessment Framework

    केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सी बी एस ई द्वारा योग्यता आधारित शिक्षा परियोजना की शुरुआत की गई है। सी बी एस ई के असेसमेंट फ्रेमवर्क का शुभारंभ 24 मार्च, 2021 को केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के द्वारा किया गया।

    यह अंग्रेजी (पाठन), विज्ञान एवं गणित विषयों के लिए तैयार किया गया है। पहले चरण में इसे चयनित केन्द्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ एवं देशभर के निजी विद्यालय में शुरू किया जाएगा। इसके बाद 2024 में सभी 25000 सी बी एस ई विद्यालयों में लागू करने की योजना है। नया प्रारूप सी बी एस ई परियोजना का भाग है।

    1.  इस परियोजना का उद्देश्य क्या है?
    इस परियोजना के अनुसार, कक्षा 6 से 10 तक के विषयों एवं संदर्भों पर आधारित एक सांकेतिक योग्यता संरचना (Frame work) बनाया गया है। इस Frame work को ब्रिटेन की संस्था अल्फा प्लस की ओर से तैयार किया गया है। इसमें ब्रिटिश काउंसिल, सी बी एस ई, ई एन आई सी, एन ए आर आई सी से भी सहयोग लिया गया है, जो इस उद्देश्य को प्राप्त करने में CBSE की मदद कर रहे हैं। यह कार्यक्रम सी बी एस ई और ब्रिटिश काउंसिल के कॉम्पिटेंसी बेस्ट एजुकेशन प्रोजेक्ट (Competency Based Approach Project) के अंतर्गत किया जा रहा है। प्रकरण आधारित दृष्टिकोण से दक्षता आधारित दृष्टिकोण में रूपांतरित करने के लिए यह परियोजना स्कूलों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप माध्यमिक स्तर पर वैश्विक तुल्य योग्यता आधारित मूल्यांकन को डिजाइन करने हेतु अपनी क्षमता का निर्माण करने में मदद करेगी।

    2.  इस परियोजना की विशेषताएँ क्या हैं ?
    यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निर्धारित दृष्टि के साथ संरेखित है, जो एक ऐसी प्रणाली से बदलाव का आह्वान करती है जो रटने के स्थान पर कौशल का परीक्षण करती है। यह एक ऐसी मूल्यांकन प्रणाली है जो 21वीं सदी हेतु उच्च स्तरीय कौशल का परीक्षण करती है। ब्रिटिश काउंसिल के साथ सी बी एस ई की यह योग्यता आधारित शिक्षा परियोजना छात्रों के कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को विकसित करने पर केंद्रित है। नई सी बी एस ई प्रणाली कक्षाओं के अंदर छात्रों को दिए गए नियमित पाठ्य पुस्तक के साथ काम करेगी।

    3.  इस परियोजना से कौन-कौन प्रभावित होंगे ?
    यह परियोजना प्रत्यक्ष रूप से 2000 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों , 180 प्रश्न पत्र लेखकों और 360 मास्टर ट्रेनर्स के साथ वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एवं एजुकेशनल लीडर्स को सहयोग देने के उपरांत उनके समर्थन से 25,000 सी बी एस ई विद्यालयों;1,32,000 शिक्षकों और 2024 तक भारत में दो करोड़ विद्यार्थियों को प्रभावित करेगी।

    4.  असेसमेंट फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य क्या है?
    यह असेसमेंट फ्रेमवर्क एन सी ई आर टी और सी बी एस ई पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य कक्षा 6-10 तक पढ़ाया जाने वाले अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषयों के स्तर में सुधार लाना है।

    वहीं सीबीएसई के कॉम्पिटेंसी बेस्ट एजुकेशन प्रोजेक्ट का उद्देश्य छात्रों के अंदर क्रिएटिव थिंकिंग(creative thinking) , क्रिटिकल थिंकिंग(critical thinking) , प्रॉब्लम सॉल्विंग(problem solving) , सेल्फ अवेयरनेस(self awareness) , एम्पैथी(empathy) , डिसीजन मेकिंग(decision making) , इफेक्टिव कम्युनिकेशन(effective communication) , इंटरपर्सनल रिलेशनशिप(Inter personal relationship) , कोपिंग विथ स्ट्रेस(coping With stress) और कोपिंग विथ इमोशंस (coping With emotions) जैसे 10 लाइफ स्किल्स (life skills) का विकास करना है।

    अब छात्रों को प्रतिदिन की समस्याओं और उदाहरणों के साथ विषय पढ़ाए जाएँगे । इससे के सिर्फ पास होने के लिए पढ़ाई नहीं करेंगे अपितु विश्व की वास्तविक समस्याओं को डील करने के लिए सक्षम भी होंगे।

    गांधी शांति पुरस्कार 2020(Gandhi Peace Prize)

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    1.  गांधी शांति पुरस्कार किसे दिया जाता है?
    गांधी शांति पुरस्कार (Gandhi Peace Prize) व्यक्तियों और संस्थानों को अहिंसा और अन्य गांधीवादी तरीके के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए उनके योगदान के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा वर्ष 1995 से प्रत्येक वर्ष प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा, जाति, पंथ से परे सभी व्यक्तियों के लिए है। इस पुरस्कार की स्थापना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 125 वीं जयंती पर की गई थी। इस पुरस्कार में पट्टिका के अलावा 1 करोड़ रुपये का नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र तथा अति सुंदर पारंपरिक हस्तकला /हथकरघा से बनी वस्तु प्रदान किया जाता है।

    2.  वर्ष 2020 के लिए गांधी शांति पुरस्कार(Gandhi Peace Prize) किसे दिया जाएगा ?
    वर्ष 2020 के लिए गांधी शांति पुरस्कार (Gandhi Peace Prize) बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान को प्रदान किया जाएगा।

    3.  वर्ष 2019 के लिए गांधी शांति पुरस्कार(Gandhi Peace Prize) किए दिया जाएगा?
    वर्ष 2019 के लिए ओमान के (स्वर्गीय) सुल्तान कबूस बिन सैद अल सैद को गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने और खाड़ी क्षेत्र में शांति तथा अहिंसा को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जा रहा है।

    4.  शेख मुजीबुर रहमान कौन थे?
    शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति और बाद में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री थे। 15 अगस्त, 1975 को उनकी हत्या कर दी गई। उन्हें बांग्लादेश में ‘राष्ट्रपिता’ या ‘मुजीब’ के रूप में जाना जाता है। वे अपने लाखों प्रशंसकों के लिए अदम्य साहस और अथक संघर्ष के प्रतीक हैं।
    वे बांग्लादेश के संस्थापक नेता और महान अगुआ थे। उन्हें सामान्यतः बांग्लादेश का जनक कहा जाता है। वे अवामी लीग के अध्यक्ष थे। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संग्राम की अगुवाई करते हुए बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई। उन्हें बंगबंधु की पदवी से सम्मानित किया गया।
    बांग्लादेश देश की मुक्ति के तीन वर्ष के भीतर ही 15 अगस्त, 1977 को सैनिक तख्तापलट के द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। उनकी दो बेटियों में एक शेख हसीना तख्तापलट के बाद जर्मनी से दिल्ली आई और 1981 तक दिल्ली में रही तथा 1981 के बाद पिता की राजनैतिक विरासत को संभाला।

    5.  इस पुरस्कार के लिए पात्रों का चयन किस प्रकार होता है?
    इस पुरस्कार से संबंधित जूरी की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। इसमें भारत के प्रधानमंत्री एवं लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता जूरी के दो पदेन सदस्य होते हैं। इस जूरी की बैठक 19 मार्च, 2021 को हुई थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गेनाइजेशन के संस्थापक विदेश्वर पाठक भी इस जूरी का हिस्सा हैं ।

    * पूर्व में (1995 से) गांधी शांति पुरस्कार के प्राप्त कर्ता

    (i) वर्ष 1995 —डॉ जूलियस नायरेरे (तंजानिया, के प्रथम राष्ट्रपति)
    (ii) वर्ष 1996 —ए टी अरियारत्ने (सर्वोदय श्रमदान आंदोलन के संस्थापक)
    (iii) वर्ष 1997 —गेर्हार्ड फिशर (कोढ़ एवं पोलियो पर शोध के लिए प्रसिद्ध)
    (iv) वर्ष 1998 —रामकृष्ण मिशन (स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित)
    (v) वर्ष 1999 —बाबा आम्टे (समाज सेवक)
    (vi) वर्ष 2000 —नेल्शन मंडेला, सह-प्राप्त कर्ता (भूतपूर्व द० अफ्रीका के राष्ट्रपति)
    (vii) वर्ष 2000 —बांग्लादेश ग्रामीण बैंक, सह प्राप्त कर्ता (मुहम्मद युनुस द्वारा स्थापित)
    (viii) वर्ष 2001 —जॉन ह्यूम (उत्तरी अायरिश राजनीतिज्ञ)
    (ix) वर्ष 2002 —भारतीय विद्या भवन
    (x) वर्ष 2003 —बैक्लेब हैवेल (चेकोस्लोवाकिया के अंतिम और चेक गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति)
    (xi) वर्ष 2004 —कोरेट्टा स्कॉट किंग (मार्टिन लूथर किंग की विधवा)
    (xii) वर्ष 2005 —डेस्मंड टूटू (द० अफ्रीका के क्लेरिक एवं सक्रिय)
    (xiii) वर्ष 2009 —द चिल्ड्रेन्स लीगल सेंटर
    (xiv) वर्ष 2013 —चंडी प्रसाद भट्ट (पर्यावरणवादी और सामाजिक कार्यकर्ता)
    (xv) वर्ष 2014 —भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)
    (xvi) वर्ष 2015 —विवेकानंद केंद्र (कन्याकुमारी)
    (xvii) वर्ष 2016 —अक्षम पात्र फाउंडेशन, भारत और सुलभ इंटरनेशनल (संयुक्त रूप से)
    (xviii) वर्ष 2017 —एकल अभियान ट्रस्ट
    (xix) वर्ष 2018 —श्री योही ससाकावा (जापान)