Sunday, March 7, 2021
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    सकल घरेलू उत्पाद (GDP Full Form-Gross Domestic Product)

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    GDP
    सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का क्या अर्थ है?

    1.  सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का क्या अर्थ है?
    सकल घरेलू उत्पाद(GDP) एक विशिष्ट समय अवधि में देश की सीमाओं के अंदर सभी तैयार वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य है। इसमें निजी और सार्वजनिक खपत, निवेश, सरकारी परिव्यय, निजी आविष्कार, भुगतान निर्माण लागत और विदेशी आदि शामिल हैं।

    2.  GDP कैसे निकालते हैं?
    जी पी डी की गणना में निम्नलिखित समीकरण काम में लिया जाता है –
    सकल घरेलू उत्पाद =निजी खपत (उपभोग) + सकल निवेश + सरकारी खर्च + (निर्माण-आयात) या,
    GDP = C+I+G+ (X-M)

    3.  GDP की स्थापना कब हुई?
    वर्ष 1654 और 1676 के बीच चले डच और अंग्रेजों के बीच अनुचित टेक्स को लेकर हुई लड़ाई के दौरान सर्वप्रथम जमींदारों की आलोचना करते हुए विलियम पेट्टी ने जी डी पी जैसी अवधारणा पेश की। यद्यपि जी डी पी की आधुनिक अवधारणा सर्वप्रथम 1934 में अमेरिकी कांग्रेस रिपोर्ट के लिए सिमोन कुनजेर ने पेश किया।

    4.  घरेलू आय क्या है?
    देश के घरेलू क्षेत्र में सभी उत्पादक इकाइयों द्वारा की गई मूल्य वृद्धि का योग घरेलू आय कहलाता है। इन उत्पादकों को निवासी और अनिवासी वर्गों के साधन सेवाएँ प्राप्त होती हैं। अतः इनमें उत्पादन में से इन समूहों को साधन आय भी प्राप्त होती है।

    5.  NDP (शुद्ध घरेलू उत्पाद) क्या है?
    NDP किसी भी अर्थ व्यवस्था का वह GDP है, जिनमें से एक वर्ष के अंतर्गत होने वाली मूल्य कटौती को घटाकर प्राप्त किया जाता है। यह एक सूची जारी करता है जिसके अनुसार विभिन्न उत्पादों में होने वाली मूल्य कटौती की दर तय होती है।

    6.  भारतीय अर्थ व्यवस्था की वर्तमान स्थिति क्या है?
    अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में भारत की जी डी पी में रिकॉर्ड 23.9% का संकुचन दर्ज किया गया है जो विगत एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे खराब प्रदर्शन है।

    7.  वर्तमान में भारत की GDP कितनी है?
    वर्तमान में भारत की जी डी पी 2.14 लाख करोड़ डॉलर (2.9 ट्रिलियन डॉलर) है जो विश्व में पाँचवें स्थान पर जाती है।

    8.  GDP कौन तय करता है?
    जी डी पी को नापने का भार सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के तहत आने वाले सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस अर्थात् केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की है। यह आॅफिस ही संपूर्ण देश से आंकड़ें इकट्ठा करता है और उसकी गणना कर जी डी पी का आंकड़ा जारी करता है।

    9.  प्रति व्यक्ति GDP क्या होती है?
    सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की सीमा में एक निर्धारित समय के भीतर तैयार सभी वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य को कहते हैं। प्रति व्यक्ति के हिसाब से आर्थिक उत्पादन कितना है। इसकी गणना किसी देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वहाँ की कुल जनसंख्या से भाग देकर निकाला जाता है।

    10.  GDP  में कृषि का योगदान क्या है?
    एफएआईएफए के अनुसार, वर्तमान समय में कृषि राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जी डी पी) में 14 प्रतिशत से अधिक योगदान करती है और देश के श्रमिकों को 40 प्रतिशत से अधिक भाग को आधी किया प्रदान करती है।

    11.  GDP में किस क्षेत्र का सर्वाधिक योगदान होता है?
    भारत के सकल घरेलू उत्पाद में सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है। वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का 53.66% योगदान है। दूसरे स्थान पर औद्योगिक क्षेत्र का योगदान है जो कि जी डी पी में लगभग 31% योगदान देता है।

    12.  विभिन्न देशों में GDP के स्तर की तुलना किस प्रकार की गति है?
    विभिन्न देशों में GDP के स्तर की तुलना निम्न में से किसी एक के अनुसार उनके मान को राष्ट्रीय मुद्रा में बदला जाता है —
    *  वर्तमान मुद्रा विनिमय दर :GDP की गणना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार पर प्रचलित विनिमय दरों के द्वारा की जाती है।
    *  शक्ति समता विनिमय दर की खरीद :GDP की गणना एक चयनित मानक (प्रायः संयुक्त राज्य डॉलर) की तुलना में प्रत्येक मुद्रा की क्रयशक्ति समता (PPP) के द्वारा की जाती है।

    हरिद्वार महाकुंभ 2021

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    Haridwar Kumbh 2021
    Haridwar Kumbh

    1.  कुम्भ किसे कहते हैं?

    ‘कु’ पृथ्वी को कहते हैं तथा उम्भ परिपूरित करने को कहते हैं अर्थात् जो अपने प्रभाव से पृथ्वी को तेज और दिव्यता से भर दे, वह कुम्भ है। महाकुम्भ सूर्य, चंद्र और बृहस्पति के योग से लगते हैं, अतः प्रत्येक स्थान में महाकुम्भ बारह वर्षों के अंतर पर पड़ता है। कभी-कभी यह बारह वर्ष के स्थान पर ग्यारह वर्ष या तेरह वर्ष पर भी पड़ता है। लेकिन यह स्थिति बृहस्पति की गति के कारण आती है।

    इसे निम्नलिखित सारिणी से समझा जा सकता है, जिसमें महाकुम्भ की ग्रह स्थिति को देखा जा सकता है-
    (i)  स्थान – हरिद्वार
            सूर्य – मेष
          चन्द्र – मेष
    बृहस्पति – कुम्भ
          नदी – गंगा
    (ii)  स्थान – प्रयाग
            सूर्य – मकर
          चन्द्र – मकर
    बृहस्पति – वृष
          नदी – गंगा(त्रिवेणी)
    (iii)  स्थान – उज्जयिनी
            सूर्य – मेष
          चन्द्र – मेष
    बृहस्पति – सिंह
          नदी – शिप्रा
    (iv)  स्थान – नासिक
            सूर्य – सिंह
          चन्द्र – सिंह
    बृहस्पति – सिंह
          नदी – गोदावरी

    2.  भारत में कहाँ-कहाँ महाकुंभ लगते हैं?
    भारतवर्ष में चार स्थानों पर महाकुम्भ लगते हैं। ये चार स्थान हैं –
    (i) हरिद्वार (माया)  (ii) प्रयाग  (iii) उज्जयिनी (उज्जैन) और (iv) नासिक।

    3.  महाकुम्भ 12 वर्षों पर ही क्यों पड़ता है?
    बृहस्पति प्रायः 12 वर्षों बार घूमकर पुन:उसी राशि पर आता है। इसी कारण महाकुम्भ 12 वर्षों पर पड़ता है। 84 वर्षों में यह 11 वर्षों पर पुनः उसी राशि पर आता है। यह अपवाद होता है।

    4.  महाकुम्भ में कितने महत्वपूर्ण स्नान होते हैं?
    महाकुम्भ में सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि पर रहते हैं। यह स्थिति अमावस्या के दिन आती है। सूर्य और चन्द्र की युति (योग) ही अमावस्या है। अतः महाकुम्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्नान अमावस्या के दिन होता है। इसके बाद सूर्य संक्रांति के दिन स्नान होता है। तीसरा स्नान पूर्णिमा का होता है। शेष दो स्नान अन्य महत्वपूर्ण तिथियों में होते हैं। इस प्रकार महाकुम्भ में पाँच महत्वपूर्ण स्नान होते हैं।

    5.  महाकुम्भ कितने नदियों के तट पर लगते हैं?
    चार महाकुम्भ चार नदियों के तट पर लगते हैं। हरिद्वार का महाकुम्भ भगवती गंगा के तट पर लगता है। प्रयाग का महाकुम्भ गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम स्थल तीर्थराज में लगता है। उज्जयिनी का महाकुम्भ शिप्रा नदी के तट पर लगता है। अन्य नदियों की अपेक्षा यह नदी छोटी है। नासिक का महाकुम्भ गोदावरी के तट पर लगता है। गोदावरी को गंगा की तरह पवित्र और तारक माना जाता है। उज्जयिनी और नासिक में ज्योतिर्लिंग है। महाकाल के ध
    कारण नासिक के महाकुंभ का महत्व बढ़ जाता है। तीर्थयात्रा प्रयाग भगवान ब्रह्मा की यज्ञभूमि है और हरिद्वार स्वर्गद्वार है।

    6.  महाकुम्भ की खास बातें क्या हैं?
    *  महाकुंभ धार्मिक पर्व है। इसे पर्यटन या उत्सवधर्मी प्रधान नहीं बनने देना चाहिए।
    *  हरिद्वार, प्रयाग और उज्जयिनी के महाकुम्भ पूर्णिमा से आरंभ होते हैं जबकि नासिक का महाकुंभ अमावस्या से आरंभ होता है।
    *  गोदावरी का प्राचीन नाम गौतमी भी है।
    *  प्रयाग का महाकुंभ जनवरी में और नासिक का कुंभ अगस्त माह में संपन्न होते हैं।
    *  महाकुंभ स्नान का फल अश्वमेघ और वाजपेय यज्ञ के तुल्य कहा गया है।

    7.  हरिद्वार कुंभ मेला 2021: एक दृष्टि में –
    *  हरिद्वार में कुंभ मेला भारत के हरिद्वार में हर 12 वर्ष में आयोजित किया जाता है। सटीक तिथि हिंदू ज्योतिष के अनुसार निर्धारित  की जाती है। मेला तब आयोजित होता है जब  बृहस्पति कुंभ राशि में होता है और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता हैं। कुंभ मेला में छह वर्ष बाद अर्ध कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है।
    *  हरिद्वार कुंभ मेला 2021 हरिद्वार में 1 अप्रैल से 28 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए इसकी अवधि 28 दिनों तक सीमित करने का निर्णय किया गया है।
    *  इस वर्ष 11 मार्च, 2021 में शिवरात्रि के अवसर पर कुंभ मेला का पहला शाही स्नान आयोजित किया जाएगा। दूसरा शाही स्नान 12 अप्रैल, 2021 सोमवती अमावस्या के दिन पड़ेगा तथा तीसरा शाही स्नान 14 अप्रैल, 2021 को मेष संक्रांति के अवसर पर होगा। चौथा शाही स्नान 27 अप्रैल, 2021 को बैसाख पूर्णिमा के दिन पड़ेगा।

    उच्च शिक्षा आयोग

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    उच्च शिक्षा आयोग
    उच्च शिक्षा आयोग

    1.  उच्च शिक्षा आयोग क्या है?

    उच्च शिक्षा प्रणाली (Higher Education Commission) के द्वारा ही किसी देश के मानव संसाधन का उच्चतम विकास होता है, शोध एवं विकास के क्षेत्र में नवाचार होते हैं तथा देश में कौशल विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। हाल ही में उच्च शिक्षा का स्तर बढ़ाने और उसकी निगरानी के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को खत्म कर एक नए संस्थान भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (HECI) को लाने के लिए मसौदा जारी किया गया है। इस संदर्भ में मंत्रालय द्वारा शिक्षाविदों, हितधारकों और आम जनता से 7 जुलाई तक टिप्पणियाँ और सुझाव मांगे गए हैं। UGC को भंग करके उसकी जगह HECI के गठन का सुझाव मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत 2014 में गठित चार सदस्यीय हरी गौतम समिति द्वारा दिया गया था।

    2.  इस आयोग का गठन कब किया गया?
    वर्ष 2020 में आई नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग ही देश में उच्च शिक्षा का नियामक होगा। वर्ष 2019 के बजट में वित्तमंत्री ने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन खोलने की घोषणा की थी। वर्ष 2021 के बजट में इस फाउंडेशन  के लिए आने वाले पाँच वर्षों में 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की गई है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    3.  नया मसौदा क्या है?
    *  इसमें कानूनी प्रावधानों के माध्यम से अपने फैसलों को लागू करने की शक्ति होगी।
    *  आयोग के पास अकादमी गुणवत्ता के मानदंडों के अनुपालन के आधार पर अकादमिक परिचालन शुरू करने के लिए अनुमोदन प्रदान करने की शक्ति होगी।
    *  विधेयक में दंडित करने के प्रावधान भी होंगे, जो कि चरणबद्ध तरीके से काम करेंगे।
    *  आयोग एक राष्ट्रीय डेटा बेस के माध्यम से ज्ञान के उभरते क्षेत्रों के विकास और सभी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों के संतुलित विकास एवं विशेष रूप से उच्च शिक्षा में अकादमिक गुणवत्ता की निगरानी करेगा।

    4.  नए मसौदे का उद्देश्य क्या है?
    भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग निरसन अधिनियम) विधेयक 2018 के तहत UGC अधिनियम को निरस्त करना प्रस्तावित है और इसमें भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया है। HECI का ध्यान अकादमिक मानकों और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, सीखने के परिणामों और मानदंडों को निर्दिष्ट करने, शिक्षा /अनुसंधान के मानकों को निर्धारित करने पर होगा। यह मसौदा शिक्षा प्रणाली के समग्र विकास और उच्च शिक्षा संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

    5.  UGC को बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
    स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के वर्षों में उच्च शिक्षा क्षेत्र की संस्थागत क्षमता में अत्यधिक वृद्धि हुई है। विश्वविद्यालयों की संख्या वर्ष 1950 में 20 विश्वविद्यालय की तुलना में बढ़कर 2018 में 850 हो गई है। कॉलेज की संख्या में भी कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है जो 1950 में 500 से बढ़कर वर्तमान में लगभग 40,000 से अधिक है। अतः शैक्षिक संस्थानों की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण UGC के पास कार्यों का अत्यधिक बोझ परिलक्षित होता है।
    भारत का कोई भी शैक्षिक संस्थान विश्व के अनुरूप नहीं है, अतः UGC की निगरानी प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगते रहे हैं, साथ ही संस्थाओं की रैंकिंग, मूल्यांकन और अन्य मानदंडों ने शिक्षा स्तर में सुधार को अपरिहार्य बना दिया है।

    6.  HECI के समक्ष प्रमुख चुनौतियां क्या हैं ?
    *  शैक्षिक संस्थाओं की अवस्थिति अलग-अलग राज्यों में है, अब जबकि वित्तीयन का अधिकार सीधे केंद्रीय मंत्रालय के पास होगा इससे राज्यों और केंद्र के मध्य राजनैतिक गतिरोध बढ़ेंगे।
    *  देश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या 2017 में 3 करोड़ 57 लाख तक पहुंच गई है जो 2014 की तुलना में लगभग 35 लाख अधिक है। बढ़ती हुई आवश्यकता की दर से अवसंरचना एवं विकास के साथ तालमेल बिठाने हेतु आयोग को अधिक प्रयास करना होगा।

    7.  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग : एक दृष्टि में
    *  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) 28दिसंबर, 1953 को आस्तित्व में आया और विश्वविद्यालय शिक्षा में शिक्षण, परीक्षा और अनुसंधान के मानकों के समन्वय, निर्धारण और रख रखाव के लिए 1956 में संसद के एक अधिनियम द्वारा यह भारत सरकार का एक सांविधिक संगठन बन गया।
    *  पात्र विश्वविद्यालय और कॉलेजों को अनुदान प्रदान करने के अतिरिक्त आयोग केन्द्र और राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा के विकास हेतु आवश्यक उपायों पर सुभाव भी देता है। यह बेंगलुरु, भोपाल, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता और पुणे में स्थित अपने 6 क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ-साथ नई दिल्ली स्थित मुख्यालय से कार्य करता है।

    अमेजोनिया-1 मिशन

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    Amazonia-1 satellite
    Amazonia-1 satellite launch by ISRO

    1.  अमेजोनिया-1 (Amazonia-1 satellite) मिशन क्या है?
    भारत के पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) सी-51 के द्वारा ब्राजील के अमेजोनिया-1 और 18 अन्य उपग्रहों का 28 फरवरी, 2021 को श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया गया। यह इसरो का इस वर्ष का पहला मिशन था। पीएसएलवी-सी51 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से लगभग 10 बजकर 24 मिनट पर उड़ान भरी और सबसे पहले लगभग 17 मिनट बाद प्राथमिक पेलोड अमेजोनिया-1 को कक्षा में स्थापित किया। करीब डेढ़ घंटे के बाद अन्य उपग्रहों को स्थापित किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने मिशन के सफल होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 2021 के लिए 14 मिशन की योजना बनाई गई है।

    2.  ब्राजील का अमेजोनिया-1 क्या करेगा?
    *  अमेजोनिया-1 ब्राजील का पहला उपग्रह है जिसे भारत से प्रक्षेपित किया जाएगा।
    *  अमेजोनिया-1, चार वर्ष तक सेवा देने वाला ब्राजील निर्मित भू-अवलोकन उपग्रह है।
    *  इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई की निगरानी करना है।
    *  यह ब्राजील में कृषि क्षेत्र से संबंधित अलग-अलग विश्लेषणों के लिए यूजर्स को रिमोट सेंसिंग डेटा प्रदान करेगा।

    3.  कौन-कौन से उपग्रह भेजे गए?
    *  अमेजोनिया-1 को प्रक्षेपित किया गया।
    *  चार अन्य उपग्रह इन-स्पेस से हैं। इनमें से तीन भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के संघ यूनिटीसैट्स से हैं।
    *  चौथी सैटेलाइट का नाम सतीश धवन सैटेलाइट है।
    *  14 सैटेलाइट्स न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के हैं।

    4.  छात्रों ने कितने उपग्रह बनाए?
    *  छात्रों द्वारा निर्मित पांच उपग्रहों में से एसडी-सैट का उद्देश्य विकिरण का अध्ययन करना आदि है।
    *  युनिटीसैट विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित एक उपग्रह है, जो रेडियो रिले सेवा प्रदान करने के लिए है।
    *  सिंधुनेत्र उपग्रह को बेंगलुरु स्थित पीईएस विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया है।इसका प्रयोग उपग्रह से चित्र प्राप्त कर संदिग्ध जहाजों की पहचान करने के लिए किया जाएगा।

    5.  मोदी की चित्र और श्रीमद्भगवद्गीता क्यों भेजी गई?
    इसरो द्वारा प्रक्षेपित 19 उपग्रहों में चेन्नई की स्पेस किड्स इंडिया का उपग्रह भी सम्मिलित है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चित्र उकेरी गई है। एसकेआई का सतीश धवन उपग्रह (एसडी-सैट) सुरक्षित डिजिटल कार्ड प्रारूप में श्रीमद्भगवद्गीता को भी अपने साथ लेकर गया है। इसके अलावा एसडी-सैट पर 25,000 नाम भी भेजे हैं।
    चेन्नई की स्पेस किड्स इंडिया (एसकेआई) ने कहा कि प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भर पहल और अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण के लिए एकजुटता और आभार व्यक्त करने के लिए अंतरिक्ष यान के शीर्ष पैनल पर प्रधानमंत्री की चित्र उकेरी गई है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता को भी अंतरिक्ष में भेजने का कारण है। उनके अनुसार, विश्व के अन्य अंतरिक्ष मिशन में अपनी पवित्र पुस्तकों को ले जाने का प्रचलन है।

    6.  इस मिशन की खास बात क्या है?
    *  637 किलोग्राम का अमेजोनिया-1 ब्राजील का पहली उपग्रह है जिसे भारत से प्रक्षेपित किया गया।
    *  44.4 मीटर लंबाई है भारत में बने पीएसएलवी-सी51 की।
    *  342 विदेशी उपग्रहों को अब तक इसरो ने प्रक्षेपित किया है।

    आत्मनिर्भर भारत अभियान

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    Atma Nirbhar Bharat
    All you need to know about atma nirbhar Bharat

    1.  आत्मनिर्भर भारत अभियान क्या है?
    आत्मनिर्भर भारत अभियान (Aatma Nirbhar Bharat Abhiyan) के माध्यम से अलग-अलग प्रकार की योजना देश के नागरिकों के लिए आरंभ की गई थी। जिससे कि देश की आर्थिक स्थिति सुधर सकें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक स्थिति को सुधारना है। जिससे कि देश की अर्थव्यवस्था पूर्ववत् हो सके।

    2.  आत्मनिर्भर भारत अभियान कब शुरू हुआ?
    आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस काल में अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए की थी। यह अभियान 12 मई, 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई। इसके अंतर्गत सबको लाभ दिया जाएगा। जिन लोगों को लॉकडाउन की मार झेलनी पड़ रही है। उन्हें सरकार द्वारा लाभार्थी बनाया जाएगा।

    3.  आत्मनिर्भर भारत बनने की आवश्यकता क्यों है?
    भारत प्राचीन काल से ही संसाधनों से परिपूर्ण देश रहा है। यहां हर प्रकार की चीजों को बनाने और उसका अपने जीवन में उपयोग कर अपने राष्ट्र निर्माण में मदद किया जा सकता है। पूरे विश्व में केवल भारत ही ऐसा देश है। जहां सबसे अधिक प्राकृतिक संसाधन पाए जाते हैं, जो कि बिना किसी देश की सहायता से वस्तुएं बना सकता है और आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा कर सकता है।

    4.  आत्मनिर्भर भारत बनने की महत्वपूर्ण बातें क्या है?
    आत्मनिर्भर भारत की घोषणा के द्वारा भारत के प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए पांच महत्वपूर्ण बातें बताई है-

    (i) इंटेंट अर्थात् इरादा करना।
    (ii) इन्क्लूजन अर्थात् समावेश करना।
    (iii) निवेश अर्थात् इन्वेस्टमेंट करना।
    (iv) इंफ्रास्ट्रक्चर अर्थात् सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करना।
    (v) नई चीजों की खोज करना।

    5.  इस अभियान से क्या लाभ होंगे?
    *  किसी दूसरे देश के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।
    *  देश में उद्योगों में बढ़ोतरी होगी।
    *  देश का हर युवा सफल और सक्षम होगा तथा सत्य ही उसके पास रोजगार होगा।
    *  देश बेरोजगारी के साथ-साथ गरीबी से भी मुक्त होगा।
    *  देश के पास अधिक धन होगा और उसकी आर्थिक व्यवस्था मजबूत होगी।
    *  आयात की जगह निर्यात बढ़ेगा, जिससे विदेशी मुद्रा का पर्याप्त मंडार होगा।

    6.  इस मिशन के कितने चरण हैं?
    यह  मिशन दो चरणों में लागू किया जाएगा –
    (i) इसमें चिकित्सा, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक, प्लास्टिक, खिलौने जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा जिससे स्थानीय विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके।

    (ii) इस चरण में फर्नीचर, फुट वेयर और एयर कंडीशनर पूंजीगत सामान तथा मशीनरी मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक, रत्न एवं आभूषण, फार्मा स्यूटिकल, टेक्सटाइल आदि शामिल हैं।

    7.  आत्मनिर्भर भारत के कितने स्तंभ हैं –
    आत्मनिर्भर भारत पाँच स्तंभों पर खड़ा है –
    (i) अर्थव्यवस्था – जो वृद्धि थील परिवर्तन के स्थान पर बड़ी उधाल पर आधारित हो।
    (ii) अवसंरचना – ऐसी अवसंरचना जो आधुनिक भारत की पहचान बने।
    (iii) प्रौद्योगिकी – 21वीं सदी प्रौद्योगिकी संचालित व्यवस्था पर आधारित प्रणाली।
    (iv)  गतिशील जनसंख्यीकि – जो आत्मनिर्भर भारत के लिए ऊर्जा के स्रोत हैं।
    (v) मांग – भारत की मांग और आपूर्ति श्रृंखला की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाना ।

    8.  इस योजना के लिए आर्थिक प्रोत्साहन का स्वरूप क्या है?
    प्रधानमंत्री ने इस योजना की दिशा में विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। यह पैकेज कोविड 19 महामारी की दिशा में सरकार द्वारा की गई है। पूर्व घोषणाओं तथा RBI द्वारा लिए गए निर्णयों को मिलाकर 20 लाख करोड़ रुपये का है जो भारत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 10% के बराबर है। पैकेज में भूमि, श्रम, तरलता और कानूनों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, बिहार

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    Bihar Sarkar scheme
    MKUY Bihar Mukyamantri Kanya Utthan Yojana

    1.  बिहार में मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना क्या है?
    बिहार सरकार ने बाल कन्या विवाह रोकने के लिए प्रमुख पहल के रूप में मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना प्रारंभ की है। इस योजना के अंतर्गत बिहार सरकार एक बालिका के जन्म पर 5000 रूपये, इंटरमीडिएट परीक्षा (अविवाहित) के पूरा होने पर 10000 रू० और स्नातक डिग्री उत्तीर्ण करने पर 25000 रू० देगी। इस महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना से प्रतिवर्ष लगभग 1.6 करोड़ लड़कियाँ लाभान्वित होंगी। यह एक सारभौमिक योजना है जो किसी जाति, धर्म और आय के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सभी लड़कियों (बिहार की मूल निवासी) के लिए उपलब्ध है।

    2.  यह योजना कब से लागू हुई?
    बिहार सरकार ने इस योजना को अप्रैल 2018 से इसे आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। वर्तमान में लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिवर्ष 840 करोड़ रूपए सरकार खर्च करती है।इस योजना में सरकार प्रतिवर्ष 1400 करोड़ रूपए अतिरिक्त खर्च करेगी। इस प्रकार अब कुल राशि 2240 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष होगी।

    3.  कन्याओं को दी जाने वाली राशि का स्वरूप क्या है?
    *  बिहार सरकार अब सभी लड़कियों को उनके जन्म के समय 5000 रूपए देगी।
    *  जब कोई लड़की (अविवाहित) इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करती है तो उसे प्रोत्साहन के रूप में 10000 रूपए मिलेंगे।
    *  जब कोई लड़की (विवाहित या अविवाहित) स्नातक की डिग्री उत्तीर्ण करती है तो उसे प्रोत्साहन के रूप में 25000 रूपए मिलेंगे।

    4.  मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का उद्देश्य क्या है?
    मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत राज्य में एक परिवार की दो लड़कियाँ इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकती है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य राज्य में कन्या शिशु भ्रूण हत्या को खत्म करना, कन्या शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, लड़कियों का जन्म पंजीकरण और पूर्ण टीकाकरण करना, लिंग अनुपात में वृद्धि करना, लड़कियों के जन्म और उनके शिक्षा को बढ़ावा देना, बाल विवाह खत्म करना, लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाना, परिवार और समाज के निर्माण में महिलाओं के योगदान में वृद्धि करना, लड़कियों के जीवन स्तर को बढ़ाना, लड़कियों के गौरव को बढ़ाना एवं लड़कियों को समाज में समानता का अधिकार दिलाना भी है।

    5.  मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के लाभ क्या हैं?
    *  लड़कियों का जीवन स्तर उठेगा।
    *  लड़का-लड़की के  लिंग भेद कम होंगे।
    *  बालिका शिशु मृत्यु दर कम होंगे।
    *  बेटी अब परिवार में बोझ नहीं समझी जाएगी।
    *  प्रत्येक लड़की को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
    *  प्रत्येक लड़की अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख पाएगी।

    6. कन्या उत्थान योजना के लिए योग्यता क्या हैं?
    *  लड़की को बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
    *  लड़की गरीब घर की होनी चाहिए।
    *  लड़की के घर कोई सदस्य सरकारी नौकरी के पद पर नहीं होना चाहिए।
    *  लड़की को 10000 रूपए की छात्रवृत्ति राशि प्राप्त करने के लिए उसे 12 वीं कक्षा का अंक पत्र जमा करना होगा।
    *  लड़की को 25000 रूपए की छात्रवृत्ति राशि प्राप्त करने के लिए उसे स्नातक का अंक पत्र जमा करना होगा।
    इसके अतिरिक्त बिहार सरकार लड़कियों को सेनेटरी नैपकिन के लिए अब 150 रू० के स्थान पर 300 रू० देगी।
    सरकार लड़कियों को कक्षा I से XII तक मिलने वाली यूनिफार्म राशि में भी बढ़ोतरी की है।

    7.  कन्या उत्थान योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या होंगे?
    *  आधार कार्ड।
    *  वोटर आई डी कार्ड की काॅपी।
    *  राशन कार्ड।
    *  बैंक पास बुक की फोटो कॉपी।
    *  पासपोर्ट साइज की फोटो।
    *  इंटरमीडिएट का अंक पत्र।
    *  स्नातक का अंक पत्र।

    हर घर जल योजना

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    Har Ghar Jal Yojna Information
    PM Har Ghar Jal Yojna

    1.  हर घर जल योजना क्या है?
    भारत सरकार ने जल जीवन मिशन या हर घर जल योजना (Har Ghar Nal Yojna) की घोषणा 2020-2021 के बजट में की था। इसका उद्देश्य देश के सभी घरों में पाइप लाइन से स्वच्छ जल पहुँचाना है। यह लक्ष्य पूरा करने के लिए 2024 तक का समय तय किया गया है। सरकार इस योजना पर 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी।
    9 अक्टूबर, 2020 को जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ”हाल ही में गोवा राज्य ने प्रत्येक ग्रामीण घर में नल कनेक्शन उपलब्ध करवा कर देश का पहला हर घर जल राज्य बना।”

    2.  यह योजना क्यों शुरू की गई?
    देश के कई क्षेत्रों में आज भी लोगों को पानी लेने के लिए कई किलोमीटर दूर तक चल कर जाना पड़ता है ऐसा साफ पानी मिल सके इसलिए किया जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने यह योजना शुरू की है। नल जल योजना में लोगों को नि:शुल्क पानी मिलेगा। हर घर में एक कनेक्शन किया गया हैं। लोगों को इसके अलावा घरों में अन्य कनेक्शन नहीं लेगें तो स्वयं करवाना होगा। विभाग द्वारा यह नहीं किया जाएगा।
    हर घर जल योजना शुरू होने से लोगों के बीच गर्मी में जल के संकट से निजात मिलेगी। उसके साथ आर्सेनिक प्रभावित इलाके के लोगों को युद्ध पेयजल मिल सकेगा।

    3.  हर घर जल योजना का उद्देश्य क्या है?
    इस योजना के अंतर्गत 2024 सरकार देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर एक घर में पीने के पानी का कनेक्शन देगी। घरों तक जल पहुँचाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसके अंतर्गत जल संरक्षण जैसे विषयों पर भी काम किया जाएगा।

    4.  हर घर जल योजना से क्या लाभ होगा?
    लोगों को घर पर ही पीने का साफ जल मिलेगा। इसके लिए उन्हें कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगा। उन्हें पानी की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।

    5.  इस योजना की विशेषताएं क्या है?
    *  नल कनेक्शन के माध्यम से प्रतिदिन 55 लीटर पर्याप्त और स्थायी पानी की आपूर्ति करना।
    *  स्वामित्व की भावना लाने के लिए पूँजीगत लागत का (नकद या क्षम) 5-10 प्रतिशत सामुदायिक योगदान।
    *  प्रदर्शन प्रोत्साहन के रूप में गाँव के बुनियादी ढाँचे की लागत से पानी समिति को 10 प्रतिशत दिया जाना।
    *  पानी की आपूर्ति की गुणवत्ता की जाँच के लिए गाँव के 5 व्यक्तियों विषेतम महिलाओं को प्रशिक्षित करना।
    *  जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न स्रोतों से योगदान स्वीकार करने के लिए राष्ट्रीय जल जीवन कोष की स्थापना करना।

    6.  इस योजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
    अभी तक केवल 50% घरों में ही पाइपलाइन से स्वच्छ जल की आपूर्ति होती है। सरकार ने इसका क्षेत्र बढ़ाने का फैसला किया है। उसने 2024 तक हर घर नल, हर घर जल पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

    7.  योजना का बजट कितना है?
    केन्द्रीय बजट में 2020-21 के दौरान 11,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। 2019-20 के दौरान लगभग 84 लाख उपभोक्ताओं को नल कनेक्शन प्रदान किए गए। अब एक लाख परिवारों को दैनिक आधार पर नल कनेक्शन दिया जा रहा है। आर्सेनिक दूषित क्षेत्र में (2019-2020) 71 लाख परिवारों और फ्लोराइड दूषित क्षेत्रों में 5.35 लाख लोगों को सुरक्षित पेयजल (DWS 2020) प्रदान किया गया। सरकार कह चुकी है कि इसमें अपनी पुरी ताकत छोक रही है। इसके लिए 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी हैं। बजट 2020-21 में इस राशि के आवंटन कर सरकार ने घोषणा की थी। इस योजना के पुरा होने पर एक आदमी को प्रतिदिन 135 लीटर जल मिलेगा।

    8.  नए बजट वर्ष 2021-22 में जल आपूर्ति की व्यवस्था क्या है? 
    *  विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वसुलभ स्वास्थ्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वच्छ जल, स्वच्छता और स्वच्छ वातावरण की महत्ता का बार-बार बल दिया गया है। इस मकसद को हासिल करने के लिए जल जीवन मिशन (शहरी) लांच किया जाएगा।
    *  इसके लिए 2,87,000 करोड़ रुपये 5 वर्ष के लिए आवंटित किए गए हैं।
    *  इसमें 4378 शहरी स्थानीय निकायों में नल से जल लक्ष्य रखा गया है।
    *  इसमें 500 अमृत शहरी की तरह अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।

    आयुष्मान भारत योजना

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    Ayushman Yojna
    Ayushman Bharat Yojna PM-JAY

    आयुष्मान भारत योजना(AYUSHMAN BHARAT PRADHAN MANTRI JAN AROGYA YOJANA)क्या है?

    मोदी केयर के नाम से प्रसिद्ध आयुष्मान भारत (PM-JAY) विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है जिसका उद्देश्य प्रति परिवार प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 10.74 करोड़ से भी अधिक निर्धन और वंचित परिवारों (लगभग 50 करोड़ लाभार्थी) को उपलब्ध कराना है जो भारतीय जनसंख्या का 40% प्रतिशत भाग है।
    इस योजना में अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च कवर किया जाएगा। पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा।
    वह मरीज को मदद करेगा और उसे अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मददगार भी होगा।
    यह वास्तव में देश के गरीब लोगों के लिए हेल्थ इश्योरेंस – स्कीमें है।

    कोरोना महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बीच, भारत देश भर में (678 जिलों में फैला 50,025 परिचालन केंद्र)आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (AB-HWCS) से अधिक कार्यात्मक बनाने में सफल रहा।

    You do not need to pay anything to avail benefits of the scheme.
    इस योजना का लाभ लेने के लिए कोई पैसा खर्च करने की ज़रुरत नहीं है |

    Toll-Free Call Center Number – 14555/ 1800111565
    Address: 7th & 9th Floor, Tower-l, Jeevan Bharati Building, Connaught Place, New Delhi – 110001 

    2.  योजना का लाभ कौन उठा सकता है?आयुष्मान भारत योजना (ABY)का लाभ लेने के लिए सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आंकड़ों का प्रयोग हुआ है।

    लाभार्थी पात्रता ग्रामीण क्षेत्र –
    (i)ग्रामीण क्षेत्र में कच्चा मकान होना चाहिए।
    (ii)परिवार की मुखिया महिला होनी चाहिए।
    (iii) परिवार में कोई व्यक्ति विकलांग होना चाहिए तथा कोई वयस्क 16-59 वर्ग की आयु का नहीं होना चाहिए।
    (iv) व्यक्ति मजदूरी करता हो।
    (v) उसकी मासिक आय 10000 से कम हो।
    (vi) वह असहाय हो।
    (vii) वह भूमिहीन हो ।

    लाभार्थी पात्रता शहरी क्षेत्र –
    (i) व्यक्ति कूड़ा कचड़ा उठाता हो।
    (ii) वह फेरी वाला हो।
    (iii) वह व्यक्ति मजदूर हो।
    (iv) वह व्यक्ति गार्ड की नौकरी करने वाला हो।
    (v) वह मोची हो।
    (vi) वह सफाई कर्मी हो।
    (vii) वह दर्जी हो।
    (viii) वह ड्राइवर हो।
    (ix) वह दुकान में काम करने वाला हो।
    (x) वह रिक्शा चलाने वाला हो।
    (xi) वह कुली का काम काने वाला हो।
    (xii) वह पेंटर हो।
    (xiii) वह कंडक्टर हो।
    (xiv) वह धोबी आदि हो।

    योजना के लिए आवेदन कैसे करना चाहिए? –
    इसके लिए आप अपने नजदीकी किसी भी रजिस्टर्ड सरकारी या प्राइवेट अस्पताल या
    काॅमन सर्विस सेंटर (CCC) जाकर आवेदन कर सकते हैं। रजिस्टर्ड सरकारी या प्राइवेट अस्पताल की जानकारी के लिए वेबसाइट pmjay.gov.in पर जा सकते हैं।

    कार्ड बनवाने का तरीका –
    (i) आपको आधिकारिक बेवसाइट mera.pmjay.gov.in पर जाना होगा।
    (ii) इसके बाद आपको एच एच डी (HHD)कोड को चुनना होगा। 
    (iii) इसके बाद आपको इस कोड को काॅमन सर्विस सेंटर में आयुष्मान मित्र को देना होगा।
    (iv) आयुष्मान मित्र कॉमन सर्विस सेंटर आगे प्रक्रिया पूरी करेंगे।

    आयुष्मान भारत के लिए पात्रता –
    सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के अनुसार ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ परिवार और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत योजना (ABY) के दायरे में आएँ है, जो इस योजना में हर परिवार को सालाना पाँच लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है।

    यह योजना कब शुरू हुई और अभी तक कितनो को लाभ मिला है?
    इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2018 को भीम राव अम्बेडकर की जयन्ती पर झारखंड के रांची जिले से आरंभ किया था। 2018 के बजट सत्र में तत्कालीन वित्तमंत्री अरूण जेटली ने इस योजना की घोषणा की। इसके अंतर्गत आनेवाले प्रत्येक परिवार को 5 लाख तक का धन रहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना 25 सितंबर 2019 से शुरू हो चुकी है।

    केंद्र सरकार इस योजना के अंतर्गत देश के 10 करोड़ परिवारों या 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रूपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करा रही है।

    अभी तक इस योजना से 20 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिल चुका है।

    अल्लेप्पी :पूरब का वेनिस

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    Alleppey
    Alleppey Venice

    केरल स्थित इस जगह की अप्रतिम शांति हर किसी को अपना बना लेती है। यहां घूमने का अर्थ है – समुद्र तट, खूबसूरत झीलों, बैकवॉटर, हाउसबोट, शिकारा और इनके बीच में बीते शांतिपूर्ण खूबसूरत पल। अपने आकर्षित दृश्यों, खारे लैगून और झूलों की सौंदर्य के कारण अल्लेप्पी को पूर्व का वेनिस कहा जाता है। यहां की प्राकृतिक हरियाली और बैकवॉटर का साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। नाव किराए पर लेकर यहां बैकवॉटर का आनंद लेना एक शानदार अनुभव है। यहां के समुद्रतट के किनारे ताड़ के पेड़ों के नीचे विश्राम करना एक अलग अनुभव देता है। कहते हैं, यहां डाॅलफिन भी नजर आती है। प्रकृति की इस गोद में शोर भी है और सुकून भी। यहां मौजूद विजया पार्क में बच्चों के लिए टॉय ट्रेन भी उपलब्ध है।

    धार्मिक स्थल –
    पन्नारासला श्री नागराजा मंदिर
    इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां नागों की पूजा होती है। बाहर से यह मंदिर एक कॉटेज जैसा नजर आता है, जहां जगह-जगह पर नागों की असंख्य मूर्तियां नजर आती है। मान्यता है कि इस मंदिर को परशुराम जी ने नागराज के लिए बनवाया था। यहां मंदार के अनेक पेड़ हैं, इस कारण मंदिर का नाम पड़ा मन्नारासला। यह भी मान्यता है कि पांच फनों वाले नागराज आज भी इस मंदिर की रक्षा करते हैं।

    श्रीकृष्ण मंदिर –
    यहां मौजूद श्रीकृष्ण मंदिर भी अपनी खूबसूरती और शांति के चलते सैलानियों को खूब आकर्षित करता है। केरल की वास्तुशिल्प शैली में निर्मित यह मंदिर दक्षिण की द्वारिका के रूप में प्रसिद्ध है।

    हाउसबोट का आनंद –
    अल्लेप्पी में हाउसबोट का आनंद भी लिया जा सकता है।यहां पर नेहरू ट्रॉफी बोट रेस का आयोजन किया जाता है।

    पांडव रॉक –
    यहां स्थित पांडव रॉक भी काफी प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यहां पांडवों ने कुछ वक्त बिताया था।

    अन्य दर्शनीय स्थल –
    कैनाल बाजार
    इसकी खासियत यह है कि यह बाजार नहर के किनारे बना है। यहां के आयुर्वेदिक मसाज सेंटर में जाना भी एक सुखद अनुभव हो सकता है। इसके अलावा यहां के कृष्णापुरम पैलेस भी जाया जा सकता हैं, जहां से केरल की संपूर्ण झलक देखने को मिल सकती है।
    यहां भारत के जाने-माने बर्ड सेंचुरी में से एक कुमारकोम बर्ड सेंचुरी है। यहां हिमालय से लेकर दूसरे देशों के भी खूबसूरत पक्षियों को देखा जा सकता है।

    अन्य स्थानीय उत्पाद –
    अल्लेप्पी पर्यटन स्थल के दौरान  यहां की स्थानीय वस्तुओं की खरीदारी भी की जा सकती है। अल्लेप्पी से लगभग 15 किलोमीटर दूरी पर वंपाकुलम हस्तशिल्प बाजार है, जो काफी लंबे क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां रेशम से बने उत्पाद, स्मृति चिह्न, हस्तशिल्प, दक्षिण भारतीय आभूषण, कालीन कॉयर उत्पाद, मसाले, गलीचे, बास्केट, मूर्तियां जैसी चीजें मिलती हैं।

    खानपान –
    अल्लेप्पी अपने खूबसूरत पर्यटन स्थलों और आकर्षित करने वाले वातावरण के साथ ही अपने स्वादिष्ट भोजन के लिए भी जाना जाता है। यहां गांव में घूमने के साथ-साथ स्ट्रीट फूड का मजा भी लिया जा सकता है। यहां के कुछ प्रसिद्ध भोजन में पुट्टू कडाला,अप्पम, वड़ा, करी के अलावा केरल के अन्य पारंपरिक भोजन व सीफूड का स्वाद भी लिया जा सकता है।

    प्रागैतिहासिक मानव की जातियाँ

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    Knowledge Purpose
    Evolution

    अनुसंधान से पता चलता है कि मानव जैसे प्राणी अथवा आदिम होमिनिड्ज सर्वप्रथम अभिनूतन काल के प्रारम्भ में प्रकट हुए।सभी समाप्त हो गए। दुर्भाग्यवश पुरापाषाण काल के मानव के कोई अस्थिपंजर भारत में प्राप्त नहीं हुए हैं, यद्यपि उन वानरों के जीवाश्म, जिनसे मानव और वर्तमान वानरों का अन्ततोगत्वा विकास हुआ, शिवालिक की पहाड़ियों में मिले हैं। इनमें से सबसे सुविख्यात वानर 80 लाख वर्षों से पहले के हैं। उन्हें रामापिथिकस नाम दिया गया है।
    आदिमानव के विशिष्ट प्रकार

    1.  ऑस्ट्रेलोपिथीकस – यह पहला वानर-मानव था जो सीधा चलता था। वह होमिनिड से मिलता-जुलता था और मध्य अफ्रीका में पाया जाता था। इसकी औसत ऊँचाई 42 से 50 इंच और भार 40 से 70 पौण्ड था। यह 5 लाख वर्ष पहले पृथ्वी पर रहता था। यह नग्न रहता था और भरण-पोषण के लिए पूर्णतया प्रकृति पर निर्भर था।

    2.  जिंजानथ्रोपस – यह आस्ट्रेलोपिथिकस की उपजाति थी। यह औजार बनाती थी और बेर, कन्दमूल और कीड़े-मकोड़े खाती थी।

    3.  जावा मानव – आदि होमिनिड प्राणियों के अवशेष जावा में मिले हैं। वहाँ एक नदी की रेती से एक खोपड़ी का ऊपरी भाग, दाँत और एक हड्डी मिली है।  ये हड्डियाँ एक ऐसे होमिनिड की थी जो सीधा होकर चल सकता था। इसीलिए इसे पिथिकांथ्रोपस इरेक्टस  कहा गया है। आज से 5 लाख वर्ष पूर्व इस पृथ्वी पर यह मानव रहता था।

    4.  पेकिंग मानव – चीन के पुराविदों ने 1929 ई० में पेकिंग के निकट खुदाई में 40 अस्थिपंजर (जीवाश्म) एक गुफा से प्राप्त किए। इसे पेकिंग मानव या सिनांथ्रोपस मानव के नाम से भी जाना जाता है। इसका चेहरा जावा मानव से कुछ विकसित है। यह मानव भी आज से 5 लाख वर्ष पूर्व ही रहता था। गुफा में जली हुई कुछ अस्थियाँ प्राप्त हुई हैं।  इसे आग का ज्ञान था। यहाँ प्राप्त औजारों से इनके द्वारा पशुओं के शिकार करने का भी बोध होता है।

    5.  निअण्डरथल मानव -1956 ई० में जर्मनी की निअण्डरथल घाटी तथा कुछ अन्य स्थानों पर आदिमानव के जीवाश्म मिले हैं। यह मध्य-पुरापाषाण काल का प्रतिनिधित्व करता है। यह मानव मृतकों का आदर करता था और शवों को पूजा की सामग्रियों सहित कब्र में दफनाता था। उसका विश्वास धर्म और पुनर्जन्म में भी था। यह आदिमानव आग जलाना, पशुओं का शिकार करना,मानव-समूहों में रहना जानता था। इसकी गर्दन छोटी, चेहरा चौड़ा और माथा ढलवाँ था। यह आज से लगभग 1 लाख 60 हजार वर्ष पूर्व पृथ्वी पर रहता था।

    6.  पिल्टडाउन मानव -यह मानव इंग्लैण्ड के पिल्टडाउन नामक स्थान की खुदाई में प्राप्त हुआ है। यहाँ मानव की खोपड़ी तथा जबड़े की कुछ अस्थियाँ भी प्राप्त हुई हैं। इसकी खोज चार्ल्स डाउसन ने सन् 1920 ई० में किया था। यह मानव आज से लगभग 2 लाख वर्ष पूर्व इस पृथ्वी पर रहता था। यह औजारों तथा हथियारों का प्रयोग करना जानता था।

    7.  क्रोमैगनॉन मानव – फ्रांस में स्थित क्रोमैगनॉन नामक स्थान पर अनेक अस्थिपंजर व अवशेष मिले हैं।  यह आज से लगभग 35 हजार वर्ष पूर्व इस पृथ्वी पर रहता था। उसकी शक्ल आधुनिक मानव से मिलती-जुलती है। यह 6 फीट से अधिक लम्बा, चौड़ा मस्तक, पतली नाक तथा ऊँची ठोड़ी वाला था। यह आदिमानव बोलना भी जानता था।

    8.  होमोसेपियन्स मानव – मध्य एशिया के कुछ क्षेत्रों में इस आदिमानव के 30 से 40 हजार वर्ष पूर्व पुराने अस्थियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह मानव दो उपजातियों में विभक्त था_क्रोमैगनॉन तथा  ग्रीमाल्डी मानव। यह पहला मानव-प्रारूप था, जिसमें ऐसे दो महत्वपूर्ण शारीरिक लक्षण पाए गए जो पहले कभी नहीं देखे गए थे। पहला लक्षण एक उभरी हुई ठोड़ी का विकास, दूसरा खोपड़ी में गोलाकार या उत्तल अग्रभाग का निर्माण।
    इसके अतिरिक्त 1907 ई० में जर्मन में स्थित हीडलबर्ग तथा 1921ई० में रोडेशिया में स्थित ब्रोकेन हिल नामक स्थानों से भी आदिमानव के अवशेष खुदाई में प्राप्त हुए हैं। उन्हें क्रमशः हीडलबर्ग मानव तथा रोडेशिया मानव के नाम से जाना जाता है।