Monday, November 30, 2020
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    लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल

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    Sardar Patel Knowledge
    Indian Pride

    सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत के लौह पुरुष के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने लगभग 200 वर्षो की गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़े अलग-अलग राज्यों को संगठित कर भारत में मिलाया और इसे एक विशाल देश बनाया।
    वल्लभ भाई का जन्म नाडियाड गाँव में एक मध्यमवर्गीय लेवा पाटीदार जाति के एक परिवार में हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई गुजराती मिडीयम स्कूल से हुई। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1910 ई० में क़ानून की पढ़ाई के  लिए वे इंग्लैंड चले गए।

    1913 ई० में डिग्री प्राप्त कर वे भारत आ गए और गुजरात के गोधरा में वकालत शुरू की। वे गोधरा से अहमदाबाद आ गए, वहाँ वे गांधीजी से प्रभावित हुए और उन्होंने गांधीवादी सिद्धांतों को अपनाने का फ़ैसला ले लिया।

    1918 ई० में उन्होंने एक ‘नो टैक्स अभियान’ की शुरुआत की। इस आंदोलन के कारण अंग्रेज़ी सरकार को किसानों से ली हुई भूमि वापस करनी पड़ी। उनके इन प्रयासों के कारण उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि दी गई।

    1917 ई० में वे अहमदाबाद के प्रथम स्वच्छता आयुक्त के रूप में चुने गए। उसके बाद वे कांग्रेस पार्टी के गुजरात सभा के सचिव निर्वाचित हुए। 1920 ई० में उन्हें गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष चुना गया।

    1930 ई० में नमक आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें जेल भेजा गया। 1931 ई० में उन्हें कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।

    1942 ई० में गांधी जी के असहयोग आंदोलन में उन्होंने, गांधीजी के साथ पूरे देश का दौरा किया, जिसके कारण वे जेल गए और 1945 ई० में रिहा हुए।

    स्वतंत्रता से कुछ ही समय पहले मोहम्मद अली जिन्ना ने एक अलगाववादी आंदोलन की शुरुआत की, जिसके कारण काफ़ी दंगे हुए। सरदार पटेल का मानना था की इस साम्प्रदायिक संघर्ष के कारण केंद्र की सरकार कमजोर रह जाएगी, अतः समाधान के रूप में, राज्यों के धार्मिक सुझाव के आधार पर एक अलग राष्ट्र बनाने के प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने देश के पहले गृहमंत्री के साथ-साथ उप प्रधानमंत्री के पदभार को भी संभाला।

    भारत की लगभग 562 रियासतों को सफलतापूर्वक एक साथ संगठित किया लेकिन जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद को शामिल करने में उन्होंने बेहद संवेदनशील राजनीतिक सूझबूझ का परिचय भी दिया।

    रियासतों को एक साथ जोड़ने में उनकी सफलता के कारण वे ‘लौह पुरुष’ कहलाने लगे।

    सितंबर 1947 ई० में कश्मीर पर आक्रमण करने के पाकिस्तान के प्रयासों पर उन्होंने पानी फेर कर भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कभी भी राष्ट्र के लिए किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया।

    सरदार पटेल को भारत सरकार ने सन 1991 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया, वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन्हें हमेशा याद किया जाता रहेगा।

    मानव मित्र – गंगा डॉल्फिन

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    Dolphin Information
    Human Friend

    भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन (Ganga Dolphin) है। इसका वैज्ञानिक नाम पलेटेनिस्टा गैंगगेटिका (Platanista Gangetica) है। यह मीठे पानी में रहने वाला एक स्तनपाई मछली जैसा जीव है।

    डॉल्फिन बच्चो को जन्म देती है। दो से तीन वर्ष में एक ही बार में एक बच्चे को जन्म देती है। इसके बच्चे 70 सेमी० लंबे और 7.5 किग्रा० के होते है। डॉल्फिन अपने बच्चों को दूध पिलाती है। यह नेत्रहीन होता है किन्तु इसकी सूंघने की शक्ति अत्यंत उच्चकोटि की है। गंगा डॉल्फिन को ‘गंगा टाइगर’ के रूप में चिह्नित किया गया है।

    यह स्वस्थ जलीय पर्यावरण का सूचक माना जाता है  गांगेय डॉल्फिन नदी पारिस्थितिकी तंग में वह भूमिका निभाती है जो कि बाघ एक जंगल में। इसका वास अधिकांशतः भारत की पवित्र गंगा नदी में उत्तर प्रदेश में नरोरा एवं बिहार में पटना साहिब तक का सीमित क्षेत्र है ।उ० प्र० एवं बिहार की स्थानीय भाषा में इसे सूंस के नाम से भी जाना जाता है।
    भारतीय सरकार ने 5 अक्टूबर, 2009 को इसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था।
    तब से गंगा में डॉल्फिन की गिनती की जाती है।

    ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ अभियान के द्वारा वर्ल्ड वाइड फंड टीम गंगा में गिनती करती है। बिजनौर से नरोरा तक गंगा के लगभग 225 किमी० धारा में डॉल्फिन की गिनती की जाती है  गंगा में 2016 में 30 डॉल्फिन मिली।

    2017 में इनकी संख्या बढ़कर 32 और 2018 में बढ़कर 33 हो गई। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने से ही इसकी संख्या में भी वृद्धि हो सकेगी।

    प्रमुख रोचक तथ्य —
    1. वर्तमान में पृथ्वी पर डॉल्फिन की 41 जीवित प्रजातियाँ है। इनमें से 37 समुद्रों में और 4 नदियों में पाई जाती है।
    2. जंतुओं में सबसे लंबी याद्दाश्त डॉल्फिन की ही होती है।
    3. डॉल्फिन की उम्र 15 वर्ष होती है। कुछ प्रजातियाँ 50 वर्ष तक भी जिंदा रहती है।
    4. यह मनुष्य से 10 गुना अधिक सुन सकती है।
    5. सबसे छोटी डॉल्फिन 4 फिट की और सबसे लंबी डॉल्फिन 32 फिट की होती है।
    6. इसके दाँत होते हैं, लेकिन ये भोजन को चबाती नहीं, बल्कि सीधे निगल जाती है।
    7. सबसे छोटी डॉल्फिन 40 किग्रा० की और सबसे बड़ी डॉल्फिन 9,000 किग्रा० की है।
    8. यह एक आँख खोलकर सोती है।
    9. यह 36 किमी०/घंटा की गति से भी तैर सकती है।
    10. नर डॉल्फिन को bulls और मादा डॉल्फिन को cows कहा जाता है।
    11. यह पानी में 990 फीट की गहराई तक जा सकती है और पानी से 20 फीट ऊपर तक उछल सकती है।

    भारतीय डाक सेवा के बढ़ते कदम

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    Post Office Knowledge
    Bhartiya Daak

    1. भारत में सुव्यवस्थित और पहली डाक व्यवस्था का श्रेय अलाउद्दीन खिलजी को जाता है। उसने घुड़सवारी और दौड़ाकों का व्यापक जाल फैला रखा था, जो उसकी सेना की हर गतिविधि की जानकारी उसे देते थे।


    2. शेरशाह सूरी ने इस व्यवस्था में सुधार कर उसे और उन्नत बनाया। उसने अपने पूरे राज्य में घुड़सवारों द्वारा संदेश लाने ले जाने की व्यवस्था की।

    3. भारत में व्यवस्थित एवं नियमित डाक सेवा को प्रारंभ करने का श्रेय ईस्ट इंडिया कंपनी को है। 1727 में उसने कलकत्ता में पहले डाकघर की स्थापना की थी।

    4. 1774 में महाजनी डाक व्यवस्था शुरू हुई जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनी के पत्रों के साथ कुछ शुल्क लेकर निजी पत्रों को भेजने की व्यवस्था थी।

    5. देश में पहली जी. पी. ओ. पहली जून, 1786 में मद्रास में खोला गया था।

    6. 1854 में प्रत्येक डाकघर के बाहर डब्बे यानी लेटर बाक्स लगाए गए।1892  में उनमें समय की पट्टियां भी लगाई जाने लगीं।

    7. 1840 के लगभग बंगाल में सर्वप्रथम डाकिया अथवा पोस्टमैन की नियुक्तियां की गई और इस कार्य को एक विशिष्ट सेवा माना गया।

    8. भारत एशिया में पहला देश है, जिसने सर्वप्रथम डाक टिकट जारी किया था।

    9. देश में रजिस्ट्री की शुरुआत सर्वप्रथम मुंबई में शुरू हुई उसके बाद कलकत्ता में शुरू की गई।

    10. पत्रों व पार्सलों का बीमा करने की शुरुआत 1878 में हुई।

    11. तार से मनीआर्डर भेजने की शुरुआत 1884 में हुई।

    12. भारतीय पोस्टल आर्डर का प्रचलन 1935 में शुरू हुआ।

    13. पहली टेलीग्राम मशीन 1851 में कलकत्ता में लगाई गई। बाद में 1883 में देश के सभी प्रमुख डाकघरों को तार सेवा से जोड़ दिया गया।

    14. रेलों से डाक सेवा का कार्य 1854 से आरंभ हुआ।

    15. डाक टिकट पुस्तक का प्रचलन सर्वप्रथम 1902 में हुआ था।

    16. 1911 में पहली हवाई डाक सेवा आरंभ की गई। इसकी शुरुआत इलाहाबाद से नैनी तक हुई।

    17. देश का प्रथम डाक संग्रहालय नई दिल्ली में 12 नवंबर, 1938 को खोला गया।

    18. आजादी के बाद पहला लिफाफा 6 जून, 1949 को जारी किया गया, जिस पर अशोक स्तंभ को अंकित किया गया।

    19. रसीदी टिकट या रेवेन्यू टिकट का विक्रय डाकघर से 1934 से किया जाने लगा।

    20. भारत में हवाई डाक टिकट की शुरुआत 1929 में हुई।

    21. आजादी मिलने के बाद पहला टिकट 21 नवंबर, 1947 को जारी किया गया था। तब उस पर ‘राष्ट्रीय चिह्न ‘ के साथ ‘जय हिंद’ भी लिखा हुआ था।


    22. भारत में 1972 में पिन कोड प्रारंभ किया गया।

    23. देश में 1984 में डाक जीवन बीमा का प्रारंभ किया गया ।

    24. भारत में 1985 में पोस्ट और टेलिकॉम विभाग पृथक किए गए ।

    25. भारत में 1986 में स्पीड पोस्ट (EME) सेवा शुरू की गई ।

    26. देश में 1990 में डाक विभाग मुंबई व चेन्नई में दो स्वचालित डाक प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए गए।

    27. देश में 1995 में ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत हुई ।

    28. भारत में 1996 में मीडिया डाक सेवा का प्रारंभ।

    29. देश में 1997 में बिजनेस पोस्ट सेवा को प्रारंभ किया गया।

    30. देश में 1998 में उपग्रह डाक सेवा शुरू की गई ।

    31. भारत में 1999 में डाटा डाक व एक्सप्रेस डाक सेवा प्रारंभ किया गया ।

    32. भारत में 2000 में ग्रीटिंग पोस्ट सेवा प्रारंभ की गई ।

    33. देश में 2001 में इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रान्सफर सेवा (EFT) प्रारंभ की गई ।

    34. देश में 3 जनवरी, 2002 में इन्टरनेट आधारित ट्रैक एवं टेक्स सेवा की शुरुआत हुई ।

    35. भारत में 15 सितम्बर, 2003 में बिल मेल सेवा प्रारंभ हुई ।

    36. देश में 30 जनवरी, 2004 में ई-पोस्ट सेवा की शुरुआत की गई ।

    37. भारत में 10 अगस्त, 2004 में लोजिस्टिक्स पोस्ट सेवा प्रारंभ की गई।

    Java

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    Java
    Java Image

    Introduction

    Java is a high-level object-oriented programming language for general-purpose, which was initially developed in 1991 by sun microsystem under the guidance of “James gosling”.

    Java originally called oak by “James gosling”, it was mainly designed for the development of software of the customer electronic devices like -TV, VCD, VCR, etc.

    Java was discovered, after the up-gradation of C and C++, which was an existing language. Because C and C++ had a limitation in the term of portability and reliability.

    Java removed some existing features of C and C++ because they were considered as a source problem. And thus, Java is really made simple, reliable, portable, powerful, and fast language.

    History of JAVA:

    Java was developed in 1991 by the sun microsystem group with members of James Gosling, Chris Warth, Ed Frank, and Mike Sheridan.

    This language was initially called oak but after on it was renamed as JAVA.

    Initially, it was not developed with the original aim with network /internet, but the need for PLATFORM INDEPENDENT language that could be used to create software to be embedded in various consumer electric devices.

    There is some trouble with C and C++ is that they are designed to be compiled for a specific target.

    It is possible to compile a C and C++ program for just in any type of CPU, to do so requires a full C++ compiler targeted for that CPU.

    This would be expensive and time-consuming. So, we need a solution.

    The solution to the above problem, a new portable platform-independent language was required. That would run on a variety of CPUs under different environment, so the solution is “JAVA”.

    When JAVA was invented at the same time worldwide web was emerging and JAVA was at the forefront of computer language to design because we had required the PORTABLE language for WWW.

    ग्लूकोमीटर क्या है?

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    Glucometer
    Glucometer image for information purpose only

    यह एक मधुमेह मापक उपकरण है। यह एक ऐसा उपकरण है, जिसकी सहायता से खून में ग्लूकोज की मात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इसे एसएमबीजी ( Self Monitoring of blood glucose) भी कहते हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ है कि इसकी सहायता से नियमित अंतराल में खून की जाँच घर पर ही किया जा सकता हैं। इसे 1970 में खोजा गया था, लेकिन 1980 तक आते-आते इसका प्रचलन काफी बढ़ गया। इसके आविष्कार के पहले मधुमेह को यूरिन टेस्ट के आधार पर मापा जाता था। यह इलेक्ट्रोकेमिकल सिद्धांत के आधार पर काम करता है। इसके अतिरिक्त हाइपोग्लाइसिमिया ( High Blood Pressure) के स्तर को मापने के लिए भी इसका प्रयोग होता है।
    यह कैसे कार्य करता है?
    लेंसट के माध्यम से एक बूंद रक्त लेने के बाद उसे डिस्पोजल टेस्ट स्ट्रिप में रखा जाता है, जिसके आधार पर मीटर ब्लड का ग्लूकोज लेवल मापता है। मीटर ग्लूकोज लेवल बताने में 3 से 60 सेकण्ड का समय लेता है, यह प्रयोग किए जा रहे मीटर पर निर्भर करता है। वह इसे मिग्रा० प्रति डेली० या मिलींमोल प्रति लीटर के रूप में प्रदर्शित करता है।
    इसके मुख्य पार्ट हैं — टेस्ट स्ट्रिप, कोडिंग, डिस्प्ले, क्लॉक मेमोरी। टेस्ट स्ट्रिप में एक केमिकल लगा होता है जो रक्त की बूंद में उपस्थित ग्लूकोज से क्रिया करता है। कुछ मॉडलों में प्लास्टिक स्ट्रिप होती है, जिसमें ग्लूकोज ऑक्सीडेज का प्रयोग होता है। सामान्यतः प्लाज्मा में ग्लूकोज का स्तर, पूरे खून में ग्लूकोज के स्तर की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत अधिक होता है। घरेलू ग्लूकोज मीटर पूरे ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को नापते है, जबकि टेस्ट लेब में प्रयुक्त होने वाले मीटर प्लाज्मा में ग्लूकोज के स्तर को नापते हैं।

    Image Source : wealthy mag

    उत्तराखंड : प्रकृति का चमत्कार

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    Rishikesh
    Uttarakhand Image

    उत्तराखंड यानी देव भूमी में वह सब कुछ है, जो किसी Perfect travel destination में होना चाहिए। विशालकाय हिमालय, खूबसूरत लैंडस्केप, ग्लेशियर, कलकल बहती नदियां, झील, घने जंगल और इन सबके बीच आध्यात्मिक शांति। ऋषिकेश, नैनीताल, देहरादून, मसूरी, औली, रानीखेत, भीमताल, सातताल, गढ़वाल, कौसानी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ भी मशहूर पर्यटन स्थल हैं।

    धार्मिक स्थलों में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार आदि प्रमुख हैं।

    इसके अतिरिक्त, काॅर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी नेशनल पार्क, वैली आॅफ फ्लावर्स राष्ट्रीय उद्यान आदि पर्यटकों से गुलजार रहते हैं। हरिद्वार का कुंभ मेला यहां का प्रमुख आकर्षण है, जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।

    राज्य में पर्यटन की दृष्टि से पीरंकलियार और मोहम्मदपुर के बीच गंगा नहर में रिवर राफ्टिंग और सूफी दरगाह को पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है।

    गुजरात : समृद्ध विरासत का प्रदेश

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    Gujrat Information
    Gujrat map for information purpose only

    गुजरात सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध राज्य है।

    श्रीकृष्ण का द्वारकाधीश मंदिर

    सोमनाथ मंदिर
    नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
    स्वामीनारायण मंदिर



    यह मंदिरों के लिए भी काफी मशहूर है।भगवान श्रीकृष्ण का द्वारकाधीश मंदिर हो, काठियावाड़ का सोमनाथ मंदिर या फिर द्वरकापुरी से 25 किमी० दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हर जगह असीम शांति की अनुभूति होती है।

    अंबाजी, पावागढ़, मोढ़ेरा, गांधीनगर, स्वामीनारायण मंदिर, जैन मंदिर, अहमदाबाद में महात्मा गांधी को साबरमती आश्रम और कीर्ति मंदिर जाकर बापू की यादों को सहेजा जा सकता है।

    यहां गिर राष्ट्रीय उद्यान, वेलावदार राष्ट्रीय उद्यान, बंसदा राष्ट्रीय उद्यान और मेरिन राष्ट्रीय उद्यान मिलाकर कुल चार राष्ट्रीय उद्यान हैं। गुजरात न केवल जानवरों के संरक्षण में आगे है, बल्कि यह भारत का आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से धनी राज्य भी है।

    गुजरात पारंपरिक हस्तशिल्प का केंद्र भी है, जो विश्व भर के पर्यटकों द्वारा सराहा जाता रहा है।

    गुजरात में नवरात्र के मौके पर गरबा बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव अपनी रंग-बिरंगी पहचान बना चुका है।

    तरणेतर मेला, माधवराय मेला, अंबाजी मेला डाकोर मेला, मोदेरा डांस फेस्टिवल, भावनाथ मेला, चित्र-विचित्र, लिली परिक्रमा मेला, श्यामलाल जी मेला, वौथा मेला, कैवेंट मेला, रण उत्सव, तानारिरि उत्सव पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं।

    Universal Health Services Inc Network restored after the malware attack

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    malware attack
    Malware attack on UHS network

    Universal Health Services Inc announced on Thursday, September 30, 2020, that its network is being restored after a malware attack knocked it out for five days.

    UHS has not declared on what exactly caused the incident, but experts described it as a ransomware attack.

    UHS, which runs more than 400 healthcare centers & hospitals across the globe. According to the company, its U.K operations are unaffected.

    पनडुब्बी क्या है?

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    Submarines
    Submarines details

    यह पानी के भीतर रह सकती है। यह जहाज सन् 1600 में हालैंड के वानडेबेल नामक व्यक्ति ने तैयार किया था। उस के बाद 1773 में अमेरिका के डेविड कुशनेल ने कछुए के आकार की पनडुब्बी तैयार की थी। आधुनिक पनडुब्बी को जान. पी., हालैंड निवासी तथा अमेरिका के साइमन लैक ने निर्माण किया था। सबसे
    पहली ब्रिटिश पनडुब्बी सन् 1902 में बनाई गई थी। स्वाभाविक रूप से पनडुब्बियाँ पानी के अंदर सुलभता से चल सकती हैं। कई पनडुब्बियों में ऐसी मीनारें होती हैं, जिनमें कि पेरिस्कोप लगे होते हैं, जिस के द्वारा पनडुब्बी के पानी के भीतर रहने पर भी समुद्रतल की चीजें स्पष्ट दिखाई देती है। पनडुब्बियों में दोहरे बाहरी भाग होते हैं, जिनके बीच में हवा या पानी के लिए स्थान होता हैं। नीचे का भाग ऐसा मजबूत बनाया जाता है, जो सैकड़ों मीटर गहराई में पानी के दबाव को झेल सके। 60 मी० गहराई में पानी का दबाव लगभग प्रतिवर्ग सेमी० 6 किग्रा०होता है। पानी के भीतर पनडुब्बियों की गति 38 किमी० प्रति घंटा होती हैं तथा पानी के ऊपर 19 किमी० प्रति घंटा रह जाती हैं। ये पनडुब्बियाँ, डीज़ल, पेट्रोल, बिजली या आणविक शक्ति से चलाई जा सकती हैं।

    पूर्वोत्तर भारत में पर्यटन

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    Northeast Tourism
    Green Northeast

    पूर्वोत्तर भारत में आठ राज्य हैं : अरुणाचल प्रदेश , असम , मणिपुर , मेघालय , मिजोरम , नागालैंड सिक्किम और त्रिपुरा | भारत के ये प्रदेश पर्यटन के लिए हॉट स्पॉट बनकर उभरे हैं | विगत कुछ वर्षों में इन प्रदेशों में आने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है | आठ प्रदेशों का यह विशाल भूखण्ड प्राकृतिक भंडारों का गृह माना जाता है’| सुखद अवकाश के पल व्यतीत करने के लिए यें प्रदेश आदर्श विकल्प के रूप में जाने जाते हैं |

    अरुणाचल प्रदेश
    यह एक अत्यंत सुंदर प्रदेश है | बोमाडिला, तवांग और इसके आसपास के कई दर्शनीय बौद्ध स्थल हैं | पशिघाट का प्राकृतिक सौन्दर्य देखने योग्य है | अन्नी गोंपा , वार मेमोरिअलं, माधुरी लेक , नामदफा राष्ट्रीय उद्द्यान , माउलिंग राष्ट्रीय उद्यान दर्शनीय स्थल है | लोस्सोर , सी- दोन्याई , मोपिन , सोलुंग, परशुराम कुंद मेला, लिखबली मेला आदि प्रमुख त्यौहार और मेले हैं | Adventure के शौकीन ब्रह्मपुत्र नदी में river rafting का आनंद ले सकते हैं |

    असम
    प्रकृति प्रेमियों के लिए यह प्रदेश स्वर्ग से कम नहीं है | यह चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध है | कामख्या मंदिर , नवग्रह मंदिर , काजीरंगा नेशनल पार्क , मानस उद्द्यान , विश्व की सबसे बड़ी नदी द्वीप मंजुली , चंदुबी झील , होजो , बताद्रवा सुआलकूची आदि दर्शनीय स्थल है | बिहु , बाथोव पूजा , पोरग , बैसागू, जोन झील मेला, अम्बुवासी  आदि प्रमुख पर्व और मेले हैं |

    मणिपुर
     यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य आयर पहाड़ियों की खूबसूरती दर्शनीय है | इसकी राजधानी इंफाल प्राकृतिक सौंदर्य और वन्य जीवन से घिरी हुई है | गोविंद जी मंदिर , कांगला पैलेस , युद्ध स्मारक , इमा केथेल , इम्फाल घटी आदि इसके पर्यटन मे चार चाँद लगते है | तामेंगलांग में ऑरेंज महोत्सव काफी लोकप्रिय है |
    यहाँ जाइलद झील बेहद खुबसूरत स्थल है |

    मेघालय
     मेघालय की सुंदरता अत्यंत खास है | वर्षा के मौसम में यहाँ की पहाड़ियाँ लुभावनी दिखाई देती है | इस प्रदेश की राजधानी शिलांग की खूबसूरती और यहाँ की ऊँची ऊँची पहाड़ियाँ अत्यंत मनोरम है | यहाँ वार्ड लेक , लेडी हैदरी पार्क , पोलो ग्राउंड , मिनी चिड़ियाघर , एलिफेन्ट वाटर फॉल प्रमुख पर्यटक स्थल है |

    मिजोरम
     यहाँ के खुबसुरत धान के खेत , बाँस के जंगल , कल कल बहते झरने आदि आकर्षण के केंद्र हैं | यहाँ की राजधानी आइजोल धार्मिक और सांस्कृतिक केन्द्र हैं | चमफाई और तामदिल देखने लायक है | वाततांग जलप्रपात मिजोरम में सबसे ऊँचा और अति सुंदर जलप्रपात है | ट्रैकर्स के लिए मिजोरम स्वर्ग के सामान है |

    नागालैंड
    यहाँ 16 जनजातियाँ पाई जाती है | यहाँ हार्नबिल फेस्टिवल पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं | यह फेस्टिवल पर्यटन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष मनाया जाता है , जिसमें सभी 16 जनजातियाँ अपने अपने रीति- रिवाजों , परंपराओं एवं लोक नृत्य संगीत का प्रदर्शन करते हैं | इसमें मिजोरम , मेघालय समेत पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के कलाकार भी अपने लोक संगीत और नृत्य का प्रदर्शन करते हैं | यहाँ के पर्यटन आकर्षणों में द्वितीय विश्व युद्ध का कब्रिस्तान , राज्य संग्रहालय , कोहिमा और दीमापुर के चिड़ियाघर शामिल हैं | प्रमुख शहरों में दीमापुर , कोहिमा
    , मोकोकचुंग, मों, फेक , त्वेनसांग  , वोखा , जुन्हेबाटो  मिलकर इसे अत्यंत सुंदर बनाते हैं |

    सिक्किम
    यह अपने सुंदर प्राकृतिक स्थल, बर्फ से ढके पहाड़ , रंग बिरंगे फूलों के मैदान आदि के कारण से प्रसिद्ध है | इसकी राजधानी गंगटोक पहुंचकर त्सोम्गो झील , डियर पेरक , नाथुला पास , रूमटेक मठ , इंची मठ , ताशी और लाल बाजार का भ्रमण किया जा सकता है | गुरुदौन्गमर लेक ऊंचाई वाली झीलों में से एक है | यहाँ कई पवित्र और चमकीले बौद्ध मठ, सुंदर हरी घाटियाँ और नदियां पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं | त्रिपुरा
    यह अपनी हरी-भरी घाटियों और पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है | यहाँ की राजधानी अगरतला अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल है | धलाई , कैला शहर , उनकोटी और उदयपुर यहाँ के अन्य पर्यटन आकर्षण के केंद्र हैं | उदयपुर में जहाँ त्रिपुर सुन्दरी और भुवनेश्वर मंदिर है , वहीँ कैलाशहर में देवोतार मंदिर और चाय के बागान हैं जो सभी को आकर्षित करते हैं |