Friday, January 21, 2022
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    गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम Unlawful Activities Prevention Act (UAPA)

    UAPA Act एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। हाल ही में किसान आंदोलन के अंतर्गत 26 जनवरी, 2021 को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा और सेलेब्रिटी ट्वीट विवाद के बाद इस कानून के अंतर्गत गिरफ्तारियां की गई हैं। जिन्हें लेकर देश में उबाल है।

    1.  गैर कानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA ACT) क्या है?
    इस कानून का मुख्य काम आंतकी गतिविधियों को रोकना है। इस कानून के अंतर्गत पुलिस ऐसे आतंकियों, अपराधियों या अन्य लोगों को चिह्नित करती है, जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं, इसके लिए लोगों को तैयार करते हैं या फिर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। इस मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को काफी शक्तियां प्राप्त होती है। एन आई ए महानिदेशक किसी मामले की जांच के समय संबंधित व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की-जब्ती भी करवा सकते हैं।

    2.  यह कानून कब आया तथा इसका संशोधन कब हुआ?
    यह कानून 1967 में लाया गया था। इस कानून को संविधान के अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत दी गई मूल स्वतंत्रता पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के लिए लाया गया था। यद्यपि 2004,2008, 2012 और 2019 में इस कानून में परिवर्तन किए गए। अगस्त 2019 में ही इसका संशोधन बिल संसद से पास हुआ था। इसके बाद इस कानून को शक्ति मिल गई है कि किसी भी व्यक्ति को जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इस कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति पर शक होने मात्र से ही उसे आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। इसके लिए उस व्यक्ति का किसी आतंकी संगठन से संबंध दिखाना भी आवश्यक नहीं होगा।

    3.  इस कानून के प्रावधानों का दायरा क्या है?
    इस कानून के प्रावधानों का दायरा बहुत बड़ा है। इसलिए इसका प्रयोग अपराधियों
    के अलावा एक्टिविस्ट्स और आंदोलनकारियों पर भी हो सकता है।
    UAPA के सेक्शन 2(0) के अंतर्गत भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल करने को भी गैर कानूनी गतिविधियों में  शामिल किया गया है। इस कानून के अंतर्गत ‘भारत के खिलाफ असंतोष’ फैलाना भी कानूनन अपराध है।
    *  UAPA में धारा 18,19,20,38 और 39 के अंतर्गत केस दर्ज होता है।
    *  धारा 38 तब लगती है जब आरोपी के आतंकी संगठन से जुड़े होने की बात पता चलती है। धारा 39 आतंकी संगठनों को मदद पहुँचाने पर लगाई जाती है।
    *  धारा 43D (2) में किसी व्यक्ति की पुलिस हिरासत की अवधि दुगुना करने का प्रावधान है। इसमें पुलिस को 30 दिन की कस्टडी मिल सकती है।वहीं न्यायिक हिरासत 90 दिन की भी हो सकती है।
    *  धारा 43D (5) के अनुसार, कोर्ट व्यक्ति को जमानत नहीं दे सकता, अगर उनके विरुद्ध प्रथम दृष्टया केस बनता है।
    *  गैर कानूनी संगठनों, आतंकवादी गैंग और संगठनों की सदस्यता को लेकर इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है।
    *  सरकार द्वारा घोषित आतंकी संगठन का सदस्य पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है।

    4.  इस कानून में संशोधन की आवश्यकता क्यों थी?
    मूल रूप से देश में अघोषित रूप में फैले हुए कई आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए यह प्रावधान संशोधित किए गए थे। पूर्व के कानून के अनुसार आतंकी संगठनों से संबंध रखने वाली संस्थाओं पर तो प्रतिबंध लगाए जा सकते थे लेकिन उनके संचालक या सदस्य बच जाते थे। कुछ समय बाद वे संचालक या सदस्य पुनः नए नाम से नया संगठन या नई संस्था बना लेते थे। इस संकट को भांपते हुए 2019 में केंद्र सरकार ने 1967 के बने हुए गैर – कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम में कठोर संशोधन किए। जिसके बाद से आतंकी संगठनों से किसी भी तरह का संबंध रखने वाली संस्थाओं के साथ ही उनके संचालक और सदस्य भी प्रतिबंध के दायरे में आ गए। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियां शक होने की स्थिति में उन्हें आतंकी भी घोषित कर सकती हैं ।

    5.  इस कानून (UAPA) पर विवाद का मुख्य कारण क्या है?
    इस कानून( U A P A) को लेकर विपक्षी दल और एक्टीविस्ट हमेशा से इसके विरोध में रहे हैं। उनका डर है कि सरकार इस कानून का प्रयोग उन्हें चुप कराने के लिए कर सकती है। एक्टीविस्ट समूहों के लोगों का कहना है कि सरकार इस कानून का अनाधिकृत और मनमाना प्रयोग करते हुए संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के अंतर्गत मिले अधिकारों का हनन कर सकती है। उन्हें शक है कि असली आतंकियों के साथ-साथ सरकार की नीतियों के विरोधी लेखकों, अभियुक्तों के वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर भी इसका प्रयोग हो सकता है।

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