Friday, January 21, 2022
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    Trace Biome scheme

    1.  Trace Biome scheme क्या है?
    यह scheme NIO (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी) द्वारा हिंद महासागर में जीवों की आनुवांशिक विविधता परखने के लिए एक परियोजना है। इसके अंतर्गत उन जीवों पर ट्रेस मेटल और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रभाव को मापने के लिए एक परियोजना शुरू की है। इस परियोजना को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् – CSIR द्वारा इसकी एक प्रमुख परियोजना ‘Trace Bio me’ के अंतर्गत समर्थित किया जाएगा।

    2.  इस परियोजना से क्या लाभ मिलेगा?
    CSIR – NIO की इस परियोजना द्वारा प्राप्त किए गए आंकड़ों से सतत् विकास लक्ष्यों 14: पानी के नीचे जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी ;जिसका उद्देश्य समुद्र, महासागरों और समुद्री स्रोतों के संरक्षण के साथ उनका स्थायी उपयोग करना है।

    3.  इस परियोजना के अंतर्गत क्या होगा?
    CSIR – NIO द्वारा यह परियोजना हिंद महासागर के विभिन्न भागों में तलछट, प्लवक, पानी और विभिन्न जीवों का एक विस्तृत नमूनाकरण करने का इरादा रखती है। इस नमूनाकरण से जीवों के विभिन्न रूपों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ ट्रेस  मेटल्स की उपस्थिति का अध्ययन करने में मदद मिलेगी।
    इसके अध्ययन से वैज्ञानिकों को महासागरों में GNA और RNA में परिवर्तन के साथ-साथ अन्य विभिन्न तनावकों को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

    4.  यह अभियान कब तक चलेगा?
    यह अनुसंधान वैज्ञानिक जहाज आरवी सिंधु साधना का 90 दिन तक चलने वाला अभियान 15 मार्च, 2021 को विशाखापत्तनम से 30 वैज्ञानिकों के साथ रवाना हुआ। यह अभियान मई 2021 के अंत तक दो चरणों में पूरा हो जाएगा और 9,000 समुद्री मील को कवर करेगा। यह अभियान गोवा में समाप्त होगा।

    5.  इस मिशन का संचालन NIO क्यों कर रहा है?
    CSIR-NIO के वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में जीवों के सेलुलर स्तर के संचालन को समझने के लिए महासागर में प्रोटीन और जीन की पहचान करने और उनके गुण या स्वभाव बताने के लिए एक मिशन का शुभारंभ किया है। इस मिशन के दौरान वैज्ञानिक जीनोमिक्स और प्रोटिओमिक्स जैसी उभरती बायोमेडिकल का
    उपयोग करेंगे।
    प्रोटीन-जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया के लिए एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करेंगे जो जीव समुद्री जल में झेलते हैं। प्रोटिओमिक्स का अध्ययन करके, वैज्ञानिक महासागर की बदलती परिस्थितियों में जीवों की बायो-जियो-केमिस्ट्री की पहचान करने में सफल होंगे।

    6.  महासागर जीनोम की खोज कैसे संभव हुई?
    इसकी खोज को जैव सूचना विज्ञान और अनुक्रमण तकनीकों में तेजी से बदलाव और प्रगति ने संभव बनाया है। महासागर जीनोम का आगामी अन्वेषण वाणिज्यिक जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों की बढ़ती संख्या को बढ़ाने में सक्षम होगा। यह एंटिवायरल के लिए कई एंटीकैंसर ट्रीटमेंट से लेकर काॅस्मेटिक और इंडस्ट्रियल इंजाइम्स तक अग्रसर होगा।

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