Friday, January 21, 2022
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    आदर्श किराया कानून (Model Tenancy Act 2021)

    केंद्र सरकार के नए आदर्श किराया कानून के अनुसार, मकान मालिक और किराएदारों के बीच मतभेदों को कम किया जा सकेगा। यह अधिनियम भारत में किराए के आवास पर कानूनी ढांचे के पुनर्निर्माण में मदद करेगा। जो बदले में समग्र विकास को बढ़ावा देगा। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून, 2021 को किराए की संपत्तियों पर कानून बनाने या कानूनों में संशोधन करने के लिए राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को भेजे जाने वाले मॉडल टेनेंसी एक्ट की स्वीकृति दी है। यह अधिनियम “2022 तक सभी के लिए आवास” के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करेगा।

    यह मसौदा अधिनियम वर्ष 2019 में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) द्वारा प्रकाशित किया गया था —

      What Changes?
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    * Verbal rent agreements are illegal.
    * Security deposit capped at up to 2 months rent for residential.
    * For non – residential premises, it is a maximum of 6 months.
    * Jurisdiction of civil court barred.
    * Redressal within 60 days.
    * No eviction of tenant during the tenancy period.
    * In force majeure, tenant allowed to stay for a month.
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    1. इस अधिनियम की आवश्यकता क्यों पड़ी?
    वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 1.1 करोड़ घर खाली पड़े थे और इन घरों को किराये पर उपलब्ध कराकर वर्ष 2022 तक सभी के लिए आवास के विजन को पूरा किया जाएगा।

    2. इस अधिनियम का महत्व क्या है?
    a) इस अधिनियम के अंतर्गत स्थापित प्राधिकरण विवादों और अन्य संबंधित मामलों को सुलझाने हेतु एक त्वरित तंत्र प्रदान करेगा।
    b) यह अधिनियम पूरे देश में किराए के आवास के संबंध में कानूनी ढाँचे की कायापलट करने में सहायता करेगा।
    c) यह अधिनियम सभी आय समूहों के लिए पर्याप्त किराया के अवसर उपलब्ध कराने में सहायता करेगा। जिससे बेघरों की समस्या का समाधान होगा।
    d) यह अधिनियम किराए के आवास से संबंधित औपचारिक बाजार को संस्थागत करने में मदद करेगा।
    e) इस अधिनियम से आवास की भारी कमी को दूर करने के लिए एक व्यवसाय मॉडल के रूप में किराए के आवास में निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलने की आशा है।

    3.  किराया कानून से क्या लाभ होगा ?
    नए कानून मॉडल टेनेंसी एक्ट से मकान मालिक और किराएदारों के बीच विवाद में कमी आएगी। वर्तमान में विवाद की आशंका के चलते कई मकान मालिक घर खाली होने के बाद भी किराए पर देने से कतराते हैं।

    4. किराया कानून से किरायेदार को क्या सुविधा होगी?
    Model Tenancy Act के अंतर्गत मकान मालिक को घर के निरीक्षण, मस्म्मत से जुडे़ काम या किसी अन्य उद्देश्य से आने हेतु 24 घंटे पहले लिखित नोटिस एडवांस में देना होगा। रेंट एग्रीमेंट में लिखी समय सीमा से पहले किरायेदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार दो महीने तक किराया न दिया हो या वह प्रापर्टी का गलत प्रयोग कर रहा हो।

    5. किराया कानून के अंतर्गत कितनी सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करानी होगी ?
    नए मॉडल टेनेंसी कानून के अनुसार, आवासीय भवन के लिए सिक्यूरिटी अधिकतम 2 महीने का किराया हो सकता है जबकि नॉन रेसिडेंशियल स्थानों के लिए अधिकतम 6 महीने का किराया हो सकता है।

    6. इस कानून में जगह खाली कराने का प्रावधान है?
    इस कानून के अनुसार, अगर मकान मालिक ने रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) की सभी शर्त को पूरा किया है फिर भी किराएदार, जगह खाली नहीं करता है तो मकान मालिक दो महीने के लिए किराया दोगुने कर सकता है।फिर भी खाली नहीं करने पर किराया दो महीने बाद चार गुना कर सकता है। मकान मालिक की शर्त में जगह खाली करने से पहले नोटिस दे सकते हैं। इसके बाद एक दिन पहले लिखित में या मैसेज/मेल आदि के माध्यम से जानकारी देनी होगी।

    7. मकान मालिक और किराएदार के विवाद का निपटारा कहाँ होगा?
    मकान मालिक और किराएदार के विवाद का निपटारा रेंट अथॉरिटी मेंं होगा। रेंट अथॉरिटी (Rent Authority) बनने के बाद मकान मालिक और किराएदार अथॉरिटी के सामने पेश होकर रेंट एग्रीमेंट करेंगे।दोनों पक्षों को एग्रीमेंट होने की तारीख से दो महीने के अंदर रेंट अथॉरिटी को सूचना देनी होगी। रेंट अथॉरिटी मकान मालिक और किराएदार के बीच के संबंधों को स्पष्ट करेगी।

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