Saturday, April 17, 2021
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    सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

    1.  सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट क्या है?
    राजपथ के दोनों ओर के क्षेत्र को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के आस – पास का क्षेत्र आता है। सेंट्रल विस्टा के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ क्लॉक, साउथ ब्लॉक, उपराष्ट्रपति भवन आता है। इसके अतिरिक्त नेशनल म्युजियम, नेशनल आर्काइव्ज , इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उद्योग भवन, बीकानेर हाउस, हैदराबाद हाउस, निर्माण भवन और जवाहर भवन भी सेंट्रल विस्टा का ही भाग है। केंद्र सरकार के इस पूरे क्षेत्र को रेनोवेट करने की योजना को सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है। इस भवन का शिलान्यास 10 दिसम्बर, 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा किया गया है।

    2.  नई संसद में क्या खास है?
    नए संसद भवन में लोकसभा का आकार वर्तमान संसद भवन से तीन गुना अधिक होगा। राज्यसभा का भी आकार बढ़ेगा। इस भवन का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की ओर से 64,500 वर्ग मी क्षेत्र में कराया जाएगा। इस भवन का डिजाइन एच सी पी डिजाइन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया है। यह भवन वर्ष 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर नए भारत की आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं के अनुरूप होगा। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये रखी गई है। इस परियोजना के अंतर्गत साझा केंद्रीय सचिवालय 2024 तक बनने का अनुमान है। यह परियोजना लुटियंस दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक 3 किमी लंबे क्षेत्र में फैली हुई है।

    3.  इस भवन की विशेषताएँ क्या होंगी ?
    * यह भवन त्रिभुजाकार होगा। इसमें एक बड़ा संविधान हाॅल, सांसदों के लिए लाउंज, एक लाइब्रेरी, कई कमेटियों के कमरे, डाइनिंग एरिया जैसे कई कम्पार्टमेंट होंगे। इसकी ऊँचाई पुराने संसद भवन जितनी ही होगी।
    * इस भवन में 888 लोकसभा सदस्यों और संयुक्त सत्र में 1224 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था के साथ भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसमें भी जगह बढ़ाने का विकल्प रखा जाएगा।

    4.  वर्तमान संसद भवन को आधुनिकीकृत क्यों नहीं किया जा सकता?
    वर्तमान के संसद भवन का निर्माण 1921 ई० में किया गया था। इस भवन को आधुनिक संवाद सुविधाओं और भूकंपरोधी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आधुनिकीकृत नहीं किया जा सकता क्योंकि इस भवन के अत्यधिक पुराने होने के कारण इसे हानि पहुँच सकती है। अतः आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही नए संसद भवन के निर्माण का निर्णय लिया गया है।

    5.  नई संसद की आवश्यकता क्यों है?
    सरकार के अनुसार पुराने बिल्डिंग ओवर यूटिलाइज्ड हो चुकी है और खराब हो रही है। साथ ही 2026 में लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन का काम शेड्यूल्ड है। इसके बाद सदन में सांसदों की संख्या बढ़ सकती है। बढ़े हुए सांसदों के बैठने के लिए पुरानी बिल्डिंग में पर्याप्त जगह नहीं है।
    इसके अतिरिक्त संविधान के आर्टिकल -18 में प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों का परिसीमन वर्तमान जनसंख्या के अनुसार करने का नियम है लेकिन 1971 के बाद से यह नहीं हुआ।

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