Saturday, April 17, 2021
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    विमुद्रीकरण (Demonetization) और देश की आर्थिक व्यवस्था

    1.  नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization) क्या है?
    विमुद्रीकरण (Demonetization) एक आर्थिक गतिविधि है जिसके अंतर्गत सरकार पुरानी मुद्रा को समाप्त कर देती है और नई मुद्रा को चालू करती है। जब काला धन बढ़ जाता है और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन जाता है तो इसे दूर करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है। जिनके पास काला धन होता है, वे उसके बदले में नई मुद्रा लेने का साहस नहीं जुटा पाते हैं और काला धन स्वयं ही नष्ट हो जाता है। विमुद्रीकरण के बाद पुरानी मुद्रा अथवा नोटों की कोई कीमत नहीं रह जाती। हालांकि सरकार द्वारा पुरानी नोटों को बैंकों से बदलने के लिए लोगों को समय दिया जाता है, ताकि वे अमान्य हो चुके अपने पुराने नोटों को बदल सकें।

    2.  वर्ष 2016 में कौन-कौन नोट रद्द कर दिए गए थे?
    8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में 1000 और 500 रूपए के नोट बंद करने की घोषणा की अर्थात् विमुद्रीकरण (Demonetization) की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने भी सरकार की इस घोषणा का समर्थन किया। इसके बाद सरकार 500 और 2000 रूपए के नए नोट भी बाजार में लेकर आई। आरबीआई के अनुसार 31 मार्च, 2016 तक भारत में 16. 42 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बाजार में थे, जिसमें से लगभग 14.18 लाख रुपए 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। 1938 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक 10 हजार रुपए से अधिक का नोट जारी नहीं किया।

    3.  भारत में नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization)कब-कब और कितनी बार हुआ है?
    (i)  विमुद्रीकरण (Demonetization) हमारे देश के लिए कोई नई बात नहीं थी। हमारे भारत में पहली बार वर्ष 1946 में 500, 1000 और 10 हजार के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया था।
    1970 के दशक में भी प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वांचू कमेटी ने विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था, लेकिन सुझाव सार्वजनिक हो गया, जिसके चलते नोटबंदी नहीं हो पाई।
    (ii) जनवरी 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने एक कानून बनाकर 1000,5000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए। हालांकि तत्कालीन आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल ने इस नोटबंदी का विरोध किया था।
    (iii) वर्ष 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया था।
    (iv) 2016 में भी मोदी सरकार ने 500 और 1000 के नोटों की नोटबंदी या विमुद्रीकरण का फैसला किया। इन दो करेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के 86% भाग पर कब्जा किया था। यही नोट बाजार में सबसे अधिक प्रचलन में थे। इसी कारण से इसका इतना बड़ा बवाल और परिणाम हुआ

    4.  नोटबंदी के समय भारत की स्थिति कैसी हो गई थी?
    नोटबंदी के समय पूरा भारत ‘कैशलेस’ हो गया था। सारा लेन – देन ऑनलाइन हो गया था। इस समय लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विमुद्रीकरण ने लोगों को थोड़े दिन की परेशानी जरूर दी थी लेकिन इससे बहुत ही ज्यादा लाभ भी हुआ है। ऐसा भी कहा जाता है कि विमुद्रीकरण की योजना उतनी सफल नहीं रही जितनी होनी चाहिए थी।

    5.  नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization) के लाभ क्या है?
    नोटबंदी के समय लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बहुत से लाभ भी हुए हैं –
    (i) जब लोग बैंकों में पैसा बदलवाने गए तब उनके हर एक पैसे की जानकारी सरकार के पास चली गई। जिनके पास आय से ज्यादा पैसा मिला उनसे आयकर विभाग वालों ने जाँच पड़ताल की और बहुत से लोगों के पास मौजूद काला धन पकड़ा गया।
    (ii) काला धन ही है जो आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देता है। काला धन कम होने की वजह से आतंकवाद में भी कमी हुई है। क्योंकि वे जिस काले धन को दहशत फैलाने के लिए उपयोग कर रहे थे, नोटबंदी या विमुद्रीकरण के कारण वह केवल कागज रह गया था।
    (iii) नोटबंदी या विमुद्रीकरण की वजह से बहुत सा काला धन खत्म हुआ है और वह धन सरकार के कोष में जमा हो गया । जिसके कारण सरकार के पास धन बढ़ा है और सरकार ने उन पैसों को देश के विकास में प्रयोग किया है।
    (iv) बैकों में नकद होने के कारण ब्याज दरों में भी गिरावट हुई है।
    (v) बैंकों में पैसे होने के कारण लोगों को बड़े पैमाने पर उधार भी दिया जाता है जिससे वे उद्योग लगा सकें। इस तरह से रोजगार में भी वृद्धि हुई है।
    (vi) नोटबंदी या विमुद्रीकरण के कारण आम लोगों को आर्थिक कर और उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास हुआ है। यह बहुत बड़ी बात है।
    (vii) नोटबंदी या विमुद्रीकरण के होने से सभी ऑनलाइन , डिजिटल पेमेंट करने लगे हैं। यहाँ तक की चाय वाला, किराने वाला, जेरॉक्स, प्रिंटिंग वाला भी अब ऑनलाइन भुगतान करवाता है। यह नोटबंदी से प्राप्त हुई एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
    (viii) नोटबंदी या विमुद्रीकरण के कारण नकली नोट छापने का काम भी बंद हो गया है जिसकी वजह से देश से नकली नोटों को बहुत बड़ी मात्रा में निकाल दिया गया है।

    6.  नोटबंदी या विमुद्रीकरण (Demonetization) की हानियाँ क्या हैं ?
    हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। अगर नोटबंदी के लाभ नजर आते हैं तो उसकी कुछ हानियाँ भी उसके साथ-साथ चलती आई हैं। लेकिन हानियाँ कुछ दिनों की थी और लाभ लंबे समय तक चलने वाले हैं। नोटबंदी से निम्नलिखित हानियाँ हुईं –
    (i) स्थानीय पैसा न होने के कारण सबसे ज्यादा नुकसान पर्यटन स्थलों को हुआ। बहुत से लोगों ने अपने भारत दौरे को भी रद्द किया। काम में बहुत मंदी आई।
    (ii) आम लोगों के दैनिक जीवन में तकलीफ हुई हैं।उन्हें बैंकों और एटीएम के सामने घंटों लाइनों में खड़े रहना, अस्पताल का बिल, बिजली का बिल, किराये की समस्या और बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
    (iii) लोग शादियाँ भी उतनी धूमधाम से नहीं कर पाए जितना उन्होंने सोचा था।
    (iv) वर्तमान में नोटबंदी पर बहुत सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि नोटबंदी असफल हुई है। यह एक योजना है जिसमें काले धन को सफेद किया जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि नोटबंदी से कोई लाभ नहीं हुआ है सिर्फ हानि हुई है। भारत की आर्थिक प्रगति दर 7.5 से कम होकर 6.3 हो गई है।
    (v) नए नोटों को छापने में बहुत पैसा खर्च हुआ। शायद नोटबंदी से जिस स्तर की अपेक्षाएँ की गई थी वे हासिल नहीं हुईं।

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